Spy Satellite: आज की दुनिया में जंग सिर्फ युद्ध के मैदानों तक सीमित नहीं है, वो व्यापार से लेकर अंतरिक्ष तक हर जगह घुसा है। कहने को युद्ध तो धरती पर लड़े जा रहे हैं, लेकिन इसका असल खेल आज की तारीख में अंतरिक्ष से खेला जा रहा है। चाहे वो ईरान-अमेरिका जंग हो, रूस-यूक्रेन जंग हो या फिर भारत का पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर हो, हर लड़ाई में निर्णायक फैसले, अंतरिक्ष से आए डेटा पर ही लिए गए हैं। युद्ध में जो काम पहले जासूस और गद्दार करते थे आज वही काम जासूसी उपग्रह यानि कि स्पाई सैटेलाइट कर रहे हैं। जंग भले ही जमीन पर हो लेकिन फैसले इन्हीं सैटेलाइट के आधार पर लिए जा रहे हैं। ईरान ने हाल के दिनों में रूसी-चीनी सैटेलाइट के जरिए होर्मुज पर पकड़ बनाए रखी, जिससे पूरी दुनिया का न सिर्फ व्यापार प्रभावित हुआ, बल्कि कई देशों की तो अर्थव्यवस्था ही तबाही के कगार पर पहुंच गई। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत इन्हीं सैटेलाइटों की मदद से एक दम स्टीक लक्ष्य साधते रहा। आइए आज जानते हैं स्पाई सैटेलाइट की दुनिया के बारे में…
जासूसी सैटेलाइट की दुनिया का बेताज बादशाह कौन?
जासूसी सैटेलाइट की दुनिया कोई नई नहीं है, लेकिन ये कहना गलत नहीं होगा कि आज भी यह सीमित देशों के पास ही है। अमेरिका, रूस, चीन, इजराइल इस मामले में काफी आगे हैं, जबकि भारत, फ्रांस, इंग्लैंड, पाकिस्तान समेत इस लिस्ट में शामिल तमाम देश पीछे, लेकिन बाकी दुनिया से काफी आगे हैं। भले ही रूस ने सबसे पहले सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा था, लेकिन जब बात जासूसी उपग्रहों की आती है तो अमेरिका ने बाजी मार ली। अमेरिका का नेशनल रिकॉनिसेंस ऑफिस (NRO) की कई खुफिया सैटेलाइट्स इतनी ताकतवर है कि धरती पर मौजूद किसी कार का नंबर प्लेट भी पढ़ सकती है, किसी घड़ी का टाइम भी बता सकती है। भारत के न्यूक्लियर वेपन के टेस्ट को रोकने के लिए अमेरिका कुछ ऐसी ही जासूसी सैटेलाइट का प्रयोग कर चुका है।













































