ग्वालियर: दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच का सफर अब पहले जैसा नहीं रहेगा। एनएचएआई ने आगरा से ग्वालियर के बीच 88 किलोमीटर लंबे एक हाई-स्पीड 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर काम तेज कर दिया है, जो आने वाले समय में 8 लेन का किया जा सकेगा।
इस नए एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के चालू होने से आगरा से ग्वालियर की दूरी महज 75 से 80 मिनट में सिमट जाएगी, जबकि दिल्ली से ग्वालियर का सफर सिर्फ 4 घंटे का रह जाएगा। वर्तमान में संकरी सड़कों और एनएच-44 पर भारी जाम के कारण इस यात्रा में 6 से 7 घंटे का वक्त बर्बाद होता है।
बीहड़ और चंबल सेंचुरी से गुजरेगा रूट
लगभग 4,613 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे बेहद चुनौतीपूर्ण रास्तों से गुजरेगा। रूट का एक बड़ा हिस्सा चंबल नदी और उसके बीहड़ों के पास से होकर जाएगा। यात्रा को सुगम बनाने के लिए इस पूरे मार्ग में 8 बड़े पुल, 23 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर्स और एक रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। चंबल वाइल्डलाइफ सेंचुरी के संवेदनशील क्षेत्र को देखते हुए यहां विशेष ग्रीन बेल्ट और जानवरों के लिए अंडरपास भी बनाए जाएंगे।
| उत्तर प्रदेश | 20.2 किलोमीटर | 1 (आगरा) | 14 गांव (देवरी, धनौली, शमशाबाद आदि) |
| राजस्थान | 27.0 किलोमीटर | 1 (धौलपुर) | 18 गांव (मनिया, बरेह, जाटोली आदि) |
| मध्य प्रदेश | 41.2 किलोमीटर | 2 (मुरैना और ग्वालियर) | 31 गांव (रिठौरा, बानमोर, सुसेरा आदि) |
इन तीन राज्यों के 63 गांवों को होगा सीधा फायदा
यह एक्सप्रेसवे आगरा के देवरी गांव से शुरू होकर ग्वालियर बाईपास के पास सुसेरा गांव पर समाप्त होगा। इसके दायरे में उत्तर प्रदेश (आगरा), राजस्थान (धौलपुर) और मध्य प्रदेश (मुरैना व ग्वालियर) के कुल 63 गांव आ रहे हैं। इस परियोजना के लिए 93 फीसदी से अधिक भूमि का अधिग्रहण पहले ही पूरा किया जा चुका है और एनएचएआई ने 2027-2028 तक इसे पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा है। मुरैना के पास इसका इंटरचेंज अटल प्रगति पथ से होगा, जिससे यह कोटा के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे ग्रिड से भी जुड़ जाएगा।










































