उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) ने घर खरीदारों के हितों की रक्षा और सोसायटियों के बेहतर रख-रखाव के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यूपी रेरा ने अपने ‘सामान्य विनियम, 2019’ में 12वां संशोधन अधिसूचित कर दिया है। विनियम-47 के तहत जोड़े गए इस नए बदलाव के बाद अब ‘इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी’ (IFMS) के कलेक्शन, मैनेजमेंट और ट्रांसफर को लेकर बेहद सख्त व पारदर्शी व्यवस्था लागू हो गई है। यह नियम प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपलोड होते ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
नए नियमों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. IFMS फंड के लिए अलग बैंक खाता और FD अनिवार्य
अब बिल्डर्स (प्रमोटर्स) आवंटियों से वसूली गई IFMS की रकम को अपने सामान्य खाते में नहीं रख सकेंगे। रजिस्ट्री (बिक्री, लीज या सब-लीज डीड) के समय ली जाने वाली इस राशि को किसी शेड्यूल्ड बैंक के अलग नामित (Designated) खाते में जमा करना होगा। इस सुरक्षित कोष पर अधिकतम रिटर्न पाने के लिए प्रमोटर को अलग-अलग बैंकों से कोटेशन लेकर सबसे ज्यादा ब्याज देने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) योजना में इसे निवेश करना होगा।
2. यूपी रेरा ने तय की IFMS की दरें
- मनमानी वसूली पर लगाम कसते हुए रेरा ने प्रोजेक्ट के प्रकार और आकार के आधार पर दरें निर्धारित कर दी हैं:
- ग्रुप हाउसिंग (बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट्स): फ्लैट्स की श्रेणी के अनुसार ₹20 से ₹100 प्रति वर्ग फुट।
- कमर्शियल प्रोजेक्ट्स (नॉन-एसी): ₹40 प्रति वर्ग फुट।
- कमर्शियल प्रोजेक्ट्स (सेंट्रल एसी): ₹50 प्रति वर्ग फुट।
- प्लॉटेड डेवलपमेंट्स: आवासीय और व्यावसायिक प्लॉट्स के लिए भी रेरा ने अलग दरें तय की हैं।
- 3. RWA को ट्रांसफर करनी होगी पाई-पाई
- प्रोजेक्ट के कॉमन एरिया (साझा क्षेत्रों) का हैंडओवर करते समय प्रमोटर को IFMS की पूरी रकम रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या आवंटियों के संगठन को ट्रांसफर करनी होगी। इसके साथ ही एक विस्तृत ‘ट्रांसफर स्टेटमेंट’ देना होगा, जिसमें प्रत्येक फ्लैट से मिली रकम, अब तक हुए खर्च, ऑडिट ट्रेल और अंतिम शेष राशि का पूरा लेखा-जोखा (पाई-पाई का हिसाब) शामिल होगा।
- 4. केवल तय कामों पर खर्च और CA ऑडिट जरूरी
- IFMS फंड का इस्तेमाल केवल सोसाइटी के कॉमन एरिया, उपकरणों (जैसे लिफ्ट, जनरेटर) और सामूहिक सेवाओं के रखरखाव, मरम्मत या उन्हें बदलने के लिए ही किया जा सकेगा। इसे नियमित मेंटेनेंस चार्ज से बिल्कुल अलग रखा जाएगा।
- इसके अलावा, RWA को इस पूरे फंड का बहीखाता मेंटेन करना होगा। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से इसका सालाना ऑडिट कराना अनिवार्य होगा। ऑडिट रिपोर्ट तैयार होने के 3 महीने के भीतर इसे वार्षिक आम सभा (AGM) या विशेष आम सभा (EGBM) में निवासियों के सामने प्रस्तुत करना होगा।
- बिल्डर-बायर्स के बीच विवाद खत्म होंगे
- यूपी रेरा के अध्यक्ष, संजय आर. भूसरेड्डी ने कहा कि इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य घर खरीदारों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखना और वित्तीय अनुशासन लाना है। खरीदार यह पैसा साझा सुविधाओं के लंबे समय तक सुचारू संचालन के लिए देते हैं। नए नियमों से वित्तीय पारदर्शिता आएगी, बिल्डर-बायर्स के बीच विवाद खत्म होंगे और सोसायटियों में RWA की भूमिका और अधिक मजबूत होगी।










































