इस्लामाबाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक दिलचस्प और चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ परमाणु समझौते के लिए सऊदी अरब को इजरायल को मान्यता देनी होगा। ट्रंप के बयान के बाद कहा जा रहा है कि अमेरिका किसी द्विपक्षीय समझौते के बदले पाकिस्तान पर इजरायल को मान्यता देने का दबाव डाल सकता है। सऊदी और पाकिस्तान सबसे अहम है देश हैं, जिनको अमेरिका अब्राहम अकॉर्ड में लाना चाहता है। एक्सपर्ट का मानना है कि ट्रंप के दबाव के बावजूद सऊदी और पाकिस्तान के लिए इजरायल से संबंध बहाल करना बेहद मुश्किल फैसला होगा।
यूरेशियन टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका की सऊदी से न्यूक्लियर डील के लिए अब्राहम अकॉर्ड (इजरायल को मान्यता) में आने की यह शर्त तब आई है, जब रियाद ने इजरायल से संबंधों के लिए फिलिस्तीन देश बनाने की मांग की है। पहले घोषित किए गए असैन्य परमाणु समझौते में इजरायल को मान्यता का जिक्र नहीं था। अब अचानक ट्रंप ने सऊदी अरब को चौंकाया है।
अमेरिका का सख्त रुख
वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा है कि ट्रंप ही अंतिम फैसला लेने वाले होते हैं। उन्होंने कहा है कि अगर सऊदी अब्राहम अकॉर्ड में शामिल नहीं होता है तो समझौता रद्द हो जाएगा। रियाद की ओर से कोई तुरंत प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसा लग रहा है कि सऊदी को फिलहाल जवाब देते नहीं सूझ रहा है।










































