तालिबान ने पाकिस्‍तान के आगे घुटने टेके? रिश्‍ते सुधारने की लगाई गुहार, मुनीर सेना ने बताया था BJP का ‘गुलाम’

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काबुल: पाकिस्‍तानी सेना के तालिबान को ‘काफिर’ और बीजेपी-आरएसएस का गुलाम बताए जाने के बाद अफगानिस्‍तान की सरकार के सुर में बदलाव आता दिख रहा है। तालिबान प्रवक्‍ता जबीउल्‍लाह मुजाहिद ने रविवार को कहा है कि उनकी सरकार पाकिस्‍तान के साथ तनाव को दूर करना चाहती है। तालिबान ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्‍तान ने ही रिश्‍ते खराब किए थे। तालिबानी प्रवक्‍ता ने कहा कि इस व‍िवाद को लंबा खींचने से किसी का भी फायदा नहीं होगा। तालिबान का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पाकिस्‍तान के साथ कई बार सीमा पर सैन्‍य संघर्ष हो चुका है। पाकिस्‍तान और अफगानिस्‍तान के बीच व्‍यापार बंद है।

तालिबान सरकार पहले भारत को अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए अपने फल और ड्राई फूट्स को भेजती थी। भारत से बड़े पैमाने पर चावल और अन्‍य जरूरी चीजों का आयात करती थी। इस तनाव के बाद तालिबान और भारत के बीच चाबहार पोर्ट के जरिए व्‍यापार होना शुरू हुआ लेकिन अमेरिका ने इस ईरानी पोर्ट को न‍िशाना बनाया है। इससे अफगानिस्‍तान और भारत के बीच व्‍यापार प्रभावित हुआ है। अब दोनों देश चाबहार का व‍िकल्‍प तलाश रहे हैं जो काफी मुश्किल है। अभी भारत और अफगानिस्‍तान के बीच कार्गो प्‍लेन के जरिए ट्रेड हो रहा है।तालिबान ने पाकिस्‍तान पर साधा न‍िशाना

चौतरफा जमीन से घिरा अफगानिस्‍तान पाकिस्‍तान के साथ तनाव से पहले कराची बंदरगाह पर पूरी तरह से दुनिया के साथ व्‍यापार के लिए निर्भर था। अब उसे मध्‍य एशिया के देशों जैसे ताजिकिस्‍तान पर ज्‍यादा निर्भर रहना पड़ रहा है। तालिबानी प्रवक्‍ता जबीउल्‍लाह ने कहा कि तालिबान नहीं चाहता है कि महीनों से खराब चल रहे रिश्‍ते आगे भी ऐसे ही बने रहे। मुजाहिद ने कहा, ‘पाकिस्‍तान की नीतियों की वजह से व्‍यापार बंद है और इससे अफगान व्‍यापारियों के लिए बड़ी दिक्‍कत पैदा हो गई है और इसने भी हमारे रिश्‍ते में तनाव को भड़काया है।’

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