जिला एवं सत्र न्यायालय ने पारिवारिक हत्या के एक गंभीर मामले में फैसला सुनाते हुए मृतक की पत्नी, पुत्र और पुत्री को दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीणा व्यास की कोर्ट द्वारा सुनाया गया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी लोक अभियोजक श्रवण खरे ने की।दिगोड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम विघा की है घटना
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना 25 मई 2024 की सुबह लगभग आठ बजे दिगोड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम विघा की है। यहां निवासी भागीरथ बुनकर की उसके ही पुत्र महेंद्र बुनकर (26), पत्नी उद्देती (45) और पुत्री मनीषा चढ़ार (21) ने लाठी तथा लोहे की कुदाली से पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी थी। हत्या के बाद अपराध पर पर्दा डालने के उद्देश्य से पुत्र महेंद्र बुनकर ने दिगोड़ा थाने पहुंचकर पुलिस को गुमराह करने की नीयत से झूठी सूचना दर्ज कराई। उसने बताया कि उसके पिता छत से नीचे गिर गए थे, जिन्हें उठाकर घर में लिटाया गया और दर्द की दवा लगाते समय उनकी मौत हो गई।पारिवारिक विवाद में भागीरथ की हुई हत्या
पुलिस द्वारा मामले की गहनता से की गई जांच और विवेचना के दौरान छत से गिरकर मौत होने की कहानी पूरी तरह असत्य पाई गई। साक्ष्यों से यह साफ हो गया कि पारिवारिक विवाद में पत्नी, पुत्र और पुत्री ने मिलकर ही भागीरथ की हत्या की थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर चालान कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद तीनों आरोपितों को हत्या का दोषी पाया।
न्यायालय ने महेंद्र बुनकर, उद्देती बुनकर और मनीषा चढ़ार को आजीवन कारावास तथा 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इसके अलावा पुलिस को झूठी रिपोर्ट दर्ज कराकर गुमराह करने के आरोप में दोषी पुत्र महेंद्र बुनकर को धारा 203 भादवि के तहत पृथक से 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 1000 रुपये के अतिरिक्त अर्थदंड की सजा भी सुनाई।
पोरसा: हत्या के मामले में दोषी पिता और दो बेटों को उम्रकैद
मुरैना जिले के पोरसा में लाठियों से पीट-पीटकर हत्या के छह साल पुराने मामले में अंबाह कोर्ट ने दो सगे भाई व उनके पिता को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वारदात 2 अगस्त 2020 की है।
अंबाह कोर्ट न्यायाधीश धीरज सिंह मंडलोई ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए ब्रह्मलाल केवट व उसके दो बेटों जसवंत केवट और श्यावीर केवट को आजीवन कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
लोक अभियोजन ने बताया कि प्रकरण का मुख्य गवाह सोनू गुर्जर सुनवाई के दौरान पलट गया, लेकिन पुलिस जांच, पीएम रिपोर्ट व अन्य सबूतों ने दोषियों को सजा दिलवाने में मदद की।










































