BRICS समिट से पहले ईरान ने बताया क्यों हैं भारत के साथ उसके रिश्ते खास, चाबहार प्रोजेक्ट का किया जिक्र

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की हुई बैठक का जिक्र करते हुए बाघेई ने कहा कि भारत, शंघाई सहयोग संगठन और BRICS दोनों का सदस्य है। भारत, ईरान के उन देशों में से एक है, जिसके साथ तेहरान के कारोबार एवं आर्थिक सहयोग सहति कई क्षेत्रों में अच्छे संबंध हैं।BRICS समिट से पहले ईरान ने भारत के साथ अपने रिश्तों पर बड़ी बात कही है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा है कि भारत के साथ उनके देश के संबंध दीर्घकाल से हैं और यह संबंध ऐतिहासिक एवं सभ्यतागत है। बाघेई ने कहा कि भारत के साथ इस रिश्ते को उनका देश काफी अहमियत देता है। बता दें कि ब्रिक्स समिट 2026 की इस बार मेजबानी भारत कर रहा है। यह समिट 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में आयोजित हो रहा है।

कई क्षेत्रों में भारत के साथ अच्छे रिश्ते-बाघेई

पिछले दिनों बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की हुई बैठक का जिक्र करते हुए बाघेई ने कहा कि भारत, शंघाई सहयोग संगठन और BRICS दोनों का सदस्य है। भारत, ईरान के उन देशों में से एक है, जिसके साथ तेहरान के कारोबार एवं आर्थिक सहयोग सहति कई क्षेत्रों में अच्छे संबंध हैं।

‘लगातार आगे बढ़ रहे दोनों देशों के संबंध’

उन्होंने आगे कहा कि ‘ईरान और भारत के बीच होने वाली बातचीत में आमतौर पर कई मुद्दों पर चर्चा होती है, जिसमें चाबहार बंदरगाह भी शामिल है, जो दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। हम निश्चित रूप से BRICS शिखर सम्मेलन के अवसर का उपयोग भारत के साथ आपसी हित के क्षेत्रों में अपनी चर्चा और विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए करेंगे। कुल मिलाकर, जैसा कि मैंने कहा, ईरान और भारत के बीच संबंध बहुत अच्छे हैं और लगातार आगे बढ़ रहे हैं।’साल 2024 में BRICS में शामिल हुआ ईरान

ब्रिक्स के 11 देशो में ईरान भी शामिल है। तेहरान साल 2024 में इस समूह का हिस्सा बना। अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच हो रहा यह समिट बेहद महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी शामिल होने की उम्मीद है। जिनपिंग यदि भारत आते हैं तो उनकी यह यात्रा सात साल के बाद होगी। समझा जाता है कि समिट के इतर नेताओं की द्विपक्षीय बैठकें भी होंगी। इन बैठकों में आपसी हित से जुड़े मुद्दों खासकर समकालीन क्षेत्रीय एवं वैश्विक विषयों पर चर्चा हो सकती है।

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