जस्टिस अवनींद्र सिंह कौन हैं? जिन्होंने रिटायरमेंट के दिन किया एक करोड़ एक लाख रुपए का दान, देहदान का भी लिया है फैसला

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Justice Avnindra Singh: एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह 17 सितंबर को रिटायर हो गए हैं। उन्होंने रिटायरमेंट के दिन देहदान करने का फैसला लिया है। साथ ही एक करोड़ एक लाख रुपए की राशि पीएम केयर्स फंड में डोनेट करने का फैसला किया है।जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने रिटायरमेंट के दिन अपने फैसले से सभी को भावुक कर दिया है। फेयरवेल स्पीच के दौरान उन्होंने मंच से घोषणा की है कि जीपीएफ के एक करोड़ एक लाख रुपए पीएम केयर्स फंड में डोनेट करेंगे। साथ ही मृत्यु के बाद समाज के लिए हमारा देह दान कर दें।36 सालों की सेवा के बाद हुए रिटायर

जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह 36 सालों की सेवा के बाद न्यायिक सेवा से रिटायर हुए हैं। वह देश में अलग-अलग जगहों पर जज की भूमिका में रहे हैं। कई अहम केसों में फैसले भी सुनाए हैं। रिटायरमेंट के दिन अपने फैसले से वह चर्चा में आ गए हैं।

जीवन की कमाई और देहदान का लिया फैसला

रिटायरमेंट के दिन फेयरवेल स्पीच में जस्टिस अवीनंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मैं अपने जीवन की कमाई और निधन के बाद देह को समाज को समर्पित करना चाहता हूं। साथ ही कहा कि अपने लिए जिए तो क्या जिए। उनकी बातों को सुनकर फेयरवेल में मौजूद लोग भावुक हो गए।पति-पत्नी ने काराया पंजीयन

रिटायरमेंट के दिन जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने कहा कि मैं और मेरी पत्नी ने जबलपुर मेडिकल कॉलेज में दो दिन पहले ही देहदान के लिए पंजीयन करवाया है। इस शरीर ने जीवन भर न्यायिक दायित्व को निभाया है। अब यह शरीर किसी भावी चिकित्सक के ज्ञान का माध्यम बने।

पीएम केयर्स फंड में दी राशि

देहदान के साथ ही उन्होंने एक और बड़ा फैसला लिया है। एक करोड़ एक लाख रुपए की राशि प्रधानमंत्री केयर्स फंड में दान करने की घोषणा की है। जीवनभर की न्यायिक सेवा से अर्जित धन जरूरतमंदों और समाज के लिए समर्पित है।कौन हैं जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह

जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह का लंबा न्यायिक अनुभव रहा है। 1990 में उन्होंने सिविल जज के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। 1990 से उनका यह सफर जारी रहा। मई 2023 में उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जज के रूप में शपथ ली। 17 सितंबर 2026 को वह एमपी हाईकोर्ट से रिटायर हो गए। उन्हें दोपहर साढ़े तीन बजे फुल कोर्ट फेयरवेल दिया गया। उनके रिटायरमेंट के बाद एमपी हाईकोर्ट में जजों की संख्या 38 रह गई है।

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