नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह फैसला बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में हुआ। इसके बारे में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार के मुताबिक इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि EPFO की वेतन सीमा लंबे समय तक नहीं बदली थी। साल 2004 से 2014 के बीच इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ था। इसके बाद सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। अब करीब 12 साल बाद सरकार ने इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव पिछले वर्षों में बढ़ी मजदूरी, आय में वृद्धि और औपचारिक रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
किन्हें मिलेगा फायदा?
मौजूदा व्यवस्था में 15,000 रुपये से ज्यादा मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला कर्मचारी अपने आप अनिवार्य EPF कवरेज के दायरे में नहीं आता था। अब नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 रुपये से 25,000 रुपये प्रति माह वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा हिस्सा अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में आ सकेगा। इससे कर्मचारियों को लागू नियमों के अनुसार कई सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलेंगे।
पेंशन और इंश्योरेंस का भी लाभ
- वेतन सीमा बढ़ने से कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा।
- ईपीएफ तहत कर्मचारियों को लागू योजना के प्रावधानों के अनुसार रिटायरमेंट सेविंग, EPS के तहत पेंशन सुरक्षा और EDLI के तहत बीमा सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।
सरकार पर कितना बढ़ेगा खर्च?
इस फैसले से सरकार के खर्च में भी बढ़ोतरी होगी। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सरकार का अनुमानित वार्षिक खर्च करीब 11,339 करोड़ रुपये होगा। फिलहाल सरकार करीब 10,250 करोड़ रुपये सालाना बजटीय सहायता देती है। पांच साल की अवधि में अनुमानित कुल खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।







































