अब जिम्मेदार अफसरों को थमाया गया कारण बताओं नोटिस
करंट लगाकर बाघ को मारने के बाद जलाया था शव, 4 पैर काटकर नाखून और खाल निकाली, 6 आरोपी जेल में
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पदमेश न्यूज़।बालाघाट। जिले में वन्यजीवों की सुरक्षा और वन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लामता परियोजना मंडल के परियोजना परिक्षेत्र उकवा के बीट हिर्री में नर तेंदुए और सियार का शव मिलने के बाद अब वर्ष 2024 में बाघ के शिकार का मामला भी चर्चा में आ गया है। बाघ को करंट लगाकर मारने, शव जलाने और उसके चारों पैर काटकर नाखून व खाल निकालने के गंभीर मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर 24 अक्टूबर को जेल भेजा गया था। अब इस प्रकरण में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।जिसके चलते विभाग द्वारा सम्बधित जिम्मेदारो को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
विभाग ने इन्हें थमाया नोटिस, मांगा जवाब
इस पूरे मामले में मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड, लामता परियोजना मंडल के संभागीय प्रबंधक सुंदरम निवेदन एम. ने परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी अजय कामड़े, डिप्टी रेंजर चुरन मड़ावी और बीटगार्ड अमर सिंह पंद्रे को नोटिस जारी कर 3 दिन के भीतर जवाब मांगा है। अधिकारियों से पूछा गया है कि गश्त में लापरवाही हुई या नहीं और यदि हुई, तो बाघ की मौत किन परिस्थितियों में हुई। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही गई है।
करंट से बाघ की मौत, सबूत मिटाने के लिए जलाया था शव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाघ को करंट लगाकर मारा गया था। करंट से उसका पूरा शरीर जल गया था और दांत बाहर आ गए थे। आरोपियों ने टंगिया से उसके चारों पैर काटकर नाखून और खाल निकाल लिए थे। घटना के बाद 23 अक्टूबर को बाघ के शव को हरे-भरे सागौन प्लांटेशन के बीच जला दिया गया।सवाल यह उठ रहा है कि वन्यजीव के शव को खुले और सुरक्षित स्थान पर जलाने के बजाय प्लांटेशन के भीतर क्यों जलाया गया और घटना की जानकारी व निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
कैमरा लगाकर छोड़ा गया था शव, नहीं हुई कार्रवाई
मामले में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2024 में लामता परियोजना परिक्षेत्र में बाघ के अवशेष मिलने के बाद वन विभाग ने उन्हें देखा था। अगले दिन कैमरा लगाकर शव को वहीं छोड़ दिया गया। इसके बाद शरीर के कुछ ही अवशेष बचे थे। उस समय जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई है। क्षेत्र में अन्य वन्यप्राणियों की मौत के मामलों में भी कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।
6आरोपी जेल में, अब अधिकारियों से जवाब तलब
वन विभाग ने 6 आरोपियों को 24 अक्टूबर को हिरासत में लेकर जेल भेजने की कार्रवाई की थी। अब विभागीय स्तर पर अधिकारियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में किसकी जिम्मेदारी तय होती है और क्या कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रहती है या लापरवाही सामने आने पर अन्य जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई होती है।ज्ञात हो की वन विभाग हर वर्ष अक्टूबर में वन्यजीव सप्ताह मनाकर वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण का संदेश देता है। ऐसे में बाघ जैसे संरक्षित वन्यजीव के शिकार और शव जलाने की घटना ने संरक्षण के दावों तथा मैदानी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी-सुंदरम
इस पूरे मामले को लेकर दूरभाष पर की गई चर्चा के दौरान,लामता परियोजना मंडल बालाघाट संभागीय प्रबंधक सुंदरम निवेदन एम,ने मीडिया कर्मियों को बताया कि तेंदुए की मौत के बाद रेंजर, डिप्टी रेंजर और बीटगार्ड को नोटिस जारी किया गया है। उनसे पूछा गया है कि गश्त ठीक से होती है या नहीं और यदि होती है, तो तेंदुए की मौत कैसे हुई। तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।







































