अमेरिका में बीते 24 घंटे में 1 लाख के करीब नए संक्रमित, WHO ने अन्य देशों को भी किया अलर्ट

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दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट का खतरा लगातार बढ़ते जा रहा है। अमेरिका में एक दिन में अब नए कोरोना संक्रमित मरीजों का 1 लाख के पास पहुंच चुका है। शुक्रवार को यहां कोरोना संक्रमण के 99,470 नए मामले दर्ज किए गए। साथ ही अमेरिका में बीते 24 घंटे में कोरोना से 419 लोगों की मौत हुई और 25,284 लोगों ने इसे मात दी। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट को लेकर ताजा अलर्ट जारी किया है। अमेरिका में इसे ही कोरोना की तीसरी लहर माना जा रहा है और राष्ट्रपति जो बिडेन ने कहा कि इन्हीं हालात का सामना करने के लिए अमेरिका बीते कई दिनों से तैयारी कर रहा था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुक्रवार को अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि कोविड -19 का डेल्टा वैरिएंट दुनिया के सभी देशों के लिए एक चेतावनी है। WHO ने कहा कि हालात बदतर हो जाए, उससे पहले इसके नियंत्रण पर काम करना शुरू कर देना चाहिए। WHO ने जानकारी दी है कि पहले ही भारत में पाया गया तेजी से फैलने वाला ये वैरिएंट अब 132 देशों और क्षेत्रों में सामने आया है।

डेल्टा वेरिएंट एक चेतावनी है

WHO के आपात निदेशक माइकल रयान ने कहा कि डेल्टा वैरिएंट एक चेतावनी है। यह एक कॉल टू एक्शन है जिसे हमें और अधिक खतरनाक वैरिएंट के सामने आने से पहले समझना होगा। रयान ने कहा कि हालांकि डेल्टा वैरिएंट ने कई देशों में हालात बेकाबू कर दिए हैं, लेकिन ट्रांसमिशन को नियंत्रण में लाने के लिए सिद्ध उपाय अभी भी काम कर रहे हैं जैसे सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना, हाथों की सफाई आदि। इसके अलावा WHO के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेबियस ने कहा कि कोरोना के अभी तक चार वैरिएंट ऐसे पाए गए हैं जो चिंताजनक है। टेड्रोस ने कहा कि WHO के 6 क्षेत्रों में से पांच में पिछले चार हफ्तों में एवरेज संक्रमण 80 प्रतिशत बढ़ा है।

चौथी लहर का कारण बन रहा है डेल्टा वैरिएंट

गौरतलब है कि कोरोना के बढ़ते मामले जहां एक ओर भारत में तीसरी लहर का खतरा बढ़ने के संकेत दे रहे हैं, वहीं दुनिया के अन्य देशों जैसे ब्राजील, ईरान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया आदि में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। WHO ने कहा कि डेल्टा वेरिएंट ने मध्य-पूर्व के देशों में चौथी लहर का रूप ले लिया है और अब तेजी से संक्रमण फैल रहा है। इसका मुख्य कारण यह भी है कि मिडिल ईस्ट के देशों में टीकाकरण दर काफी कम है।

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