नई दिल्ली: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले वर्कर्स के लिए पीएफ एक अनिवार्य सरकारी बचत योजना है। इसमें कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा कंट्रीब्यूट करता है जबकि कंपनी भी इतना ही योगदान देती है। एम्प्लॉयर के कंट्रीब्यूशन में से 8.33% हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है। अगर कोई वर्कर कम से कम 10 साल की सर्विस पूरी कर लेता है, तो उसे पेंशन मिलती है। अभी न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये और अधिकतम 7,500 रुपये है। लंबे समय से इसे बढ़ाने की मांग की जा रही है।ट्रेड यूनियनों और जन प्रतिनिधियों सहित विभिन्न स्टेकहोल्डर्स ने कई बार इस मांग को उठाया है। हाल में लोकसभा में एक बार फिर इस मुद्दे का उठाया गया। इसमें सरकार से पूछा गया कि क्या सरकार न्यूनतम पीएफ पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये बढ़ाने की योजना बना रही है। इस पर श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि कई स्टेकहोल्डर्स ने पेंशन बढ़ाने की मांग की है, लेकिन इस मामले पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।सोशल सिक्योरिटी कवरेजकरंदलाजे ने बताया कि सरकार EPS-95 पेंशनभोगियों के लिए ₹1,000 प्रति माह की कम से कम पेंशन सुनिश्चित करने के लिए बजटीय सहायता दे रही है। सरकार EPFO सदस्यों के लिए सोशल सिक्योरिटी कवरेज को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन कोई भी फैसला लेते समय पेंशन फंड की सस्टेनेबिलिटी और भविष्य की देनदारियों का ध्यान रखना होगा।केंद्र सरकार ने साल 2014 में ईपीएफओ के सब्सक्राइबर्स को मिलने वाली न्यूनतम पेंशन 250 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रति माह तय की थी। पिछले 12 साल में इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। साल 2020 में श्रम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को EPS के तहत न्यूनतम पेंशन को 2,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। संसद की एक समिति ने न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये करने की सिफारिश की थी।










































