EXPLAINER: क्यों पाकिस्तान से जीत के बाद भी हॉकी वर्ल्ड कप में मुश्किल है भारत की राह, जानिए सेमीफाइनल की गणित

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How Will India Qualify For FIH Men’s Hockey World Cup 2026 Semi-Final: भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने बुधवार को हॉकी विश्व कप 2026 के बहुचर्चित मुकाबले में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को करारी शिकस्त देकर दूसरे राउंड में अपनी जगह पक्की कर ली है। अब भारत का लक्ष्य सेमीफाइनल है, लेकिन क्या ये इतना आसान होने वाला है? क्यों आगे की राह बहुत मुश्किल है और क्या कहती है सेमीफाइनल की गणित, यहां जानिए।India Semi-Final Qualification Scenario In Hockey World Cup 2026: एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 में भारत की महिला और पुरुष टीमें, दोनों ही अपना दमखम दुनिया को दिखा रही हैं और शानदार प्रदर्शन के साथ एक-एक कदम लेकर आगे बढ़ती जा रही हैं। हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम (India Men’s Hockey Team) की बात करें तो उसने ग्रुप चरण में सबसे पहले वेल्स को शिकस्त दी, फिर दूसरे मुकाबले उसे इंग्लैंड से हार मिली, जबकि बुधवार को पाकिस्तान के खिलाफ चर्चित मैच में शानदार जीत के साथ दूसरे दौर में अपनी जगह पक्की कर ली। बेशक भारतीय टीम दूसरे राउंड में पहुंच गई है, लेकिन क्या सेमीफाइनल तक का रास्ता आसानी से तय कर सकेगी, ये बड़ा सवाल है, क्योंकि आगे की राह काफी कठिन होने वाली है।

पाकिस्तान के खिलाफ हरमनप्रीत सिंह की भारतीय हॉकी टीम ने 5-3 से जीत दर्ज करते हुए पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे राउंड में अपनी जगह पक्की कर ली, लेकिन ये फैंस के लिए चिंता का विषय होगा कि अब भारतीय हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें बहुत कम बची हैं। भारतीय टीम ग्रुप में 6 अंक और +2 के गोल अंतर (Goal Difference) के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि इंग्लैंड 9 अंक (11 के GD के साथ) के साथ आगे रहा।भारत का अब तक का अभियान

इतिहास में सिर्फ एक बार विश्व कप ट्रॉफी उठाने वाली भारतीय हॉकी टीम अपने दूसरे खिताब का सपना लेकर यहां पहुंची है। उसने पहले मैच में वेल्स के खिलाफ 3-1 से जीत हासिल की तो लगा कि शानदार आगाज के बाद भारतीय टीम अपने कदम अब तेजी से आगे बढ़ाएगी, हालांकि ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि इंग्लैंड की हॉकी टीम ‘स्पीड ब्रेकर’ बनी और उसने भारत को 4-2 से हराते हुए अंक तालिका में भी मजबूती हासिल कर ली। यही वो हार थी जिसने भारतीय पुरुष हॉकी टीम के लिए आगे की राह मुश्किल कर दी पांच दशकों में पहला मेडल जीतने का उनका सपना अब कठिन राह से होकर जाने वाला है।

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