देश की प्रमुख गोल्ड एक्सपोर्ट कंपनियों में शामिल Rajesh Exports Ltd (REL) एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेंगलुरु और मुंबई स्थित कंपनी के नौ परिसरों पर छापेमारी के बाद कई ऐसे तथ्य सामने आने का दावा किया है, जिन्होंने कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत की गई।
CFO को 2020 से कोई सैलरी नहीं
ED के मुताबिक कंपनी का वेतन ढांचा सामान्य कॉर्पोरेट प्रथाओं से अलग दिखाई देता है। एजेंसी का दावा है कि कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) को वर्ष 2020 से कोई वेतन नहीं दिया गया, जबकि मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) को केवल लगभग ₹17,000 प्रति माह का भुगतान किया जा रहा था। एजेंसी का कहना है कि इतनी बड़ी कंपनी में ऐसा वेतन ढांचा जांच का विषय है और इसके पीछे के कारणों की पड़ताल की जा रही है।
| क्षेत्र | ED का दावा |
|---|---|
| सोने का स्टॉक | फैक्ट्री रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में करीब 40% का अंतर मिला। |
| अफ्रीकी खदानों में निवेश | ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े दस्तावेज नहीं मिले। |
| विदेशी लेनदेन | UAE समेत अन्य देशों की कंपनियों के साथ लगभग ₹3,000 करोड़ के लेनदेन और बकाये का संदिग्ध सेट-ऑफ पाया गया। |
| शेयर लेनदेन | एनआरआई बेनामीदारों और ब्लॉक डील्स के जरिए ₹600 करोड़ से अधिक की राशि विदेश भेजने की आशंका जताई गई है। |
| अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन | कुछ संदिग्ध नाम ICIJ के डेटा लीक में भी सामने आने का दावा किया गया है। |
पहले ही SEBI भी कर चुका है कार्रवाई
ED की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब इससे पहले SEBI भी कंपनी और उसके प्रमोटर्स के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी कर चुका है। सेबी ने आरोप लगाया था कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के दौरान कंपनी ने लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के रेवेन्यू की गलत रिपोर्टिंग की, जो कंपनी द्वारा दिखाए गए कुल राजस्व का करीब 99.8% था। इसी मामले में सेबी ने कंपनी के प्रमोटर्स पर प्रतिभूति बाजार में आने पर अंतरिम रोक भी लगाई थी।
दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त
ED ने बताया कि छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। इनकी फोरेंसिक जांच की जाएगी ताकि विदेशी निवेश, गोल्ड स्टॉक और वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके। फिलहाल Rajesh Exports की ओर से ED की छापेमारी और लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।










































