भोपाल। नोएडा की त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध मौत (Twisha Sharma death case) का मामला सोमवार को अहम मोड़ पर पहुंच गया है। अगले 24 घंटों के भीतर इस केस से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट, मध्यप्रदेश हाई कोर्ट और भोपाल जिला अदालत में सुनवाई होगी। मामले को लेकर देशभर में चर्चा तेज है और जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई की। मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को सूचित किया कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाएगी। कोर्ट ने मीडिया और मामले के दोनों पक्षों से मीडिया को बयान न देने का आग्रह किया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “पीड़िता परिवार या दूसरे परिवार के बयान न लें। अन्यथा, एक वर्ग यह कह रहा है कि न्यायपालिका निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने दे रही है। हमें अपनी राज्य एजेंसियों या सीबीआई पर कोई संदेह नहीं है। यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि एक तरह का नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के जांच हो।
त्विषा के पिता नवनीधि शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने को न्याय व्यवस्था के लिए बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों का भरोसा मजबूत होगा और मामले में निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ेगी।
सास की जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह को भोपाल कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग पर सुनवाई होगी। यह याचिका शासन और त्विषा के पिता की ओर से दायर की गई है। एसआइटी द्वारा तीन नोटिस दिए जाने के बावजूद गिरिबाला सिंह पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुई हैं। ऐसे में पुलिस उनकी अग्रिम जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन दाखिल करने पर विचार कर रही है।










































