आरोपियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने के मामले में SC ने जारी किया नोटिस, मेटा-X की नीतियों पर भी सवाल

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सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा और एक्स की नीतियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसे कंटेंट से निपटने के लिए दोनों प्लेटफॉर्म की मौजूदा नीतियों में पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की ओर से आरोपियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह सोशल मीडिया पर सामग्री डालने से आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार और गरिमा प्रभावित हो सकती है। यह मामला हेमेंद्र पटेल बनाम भारत संघ से जुड़ा है। याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा और एक्स की नीतियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसे कंटेंट से निपटने के लिए दोनों प्लेटफॉर्म की मौजूदा नीतियों में पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।

इसी साल मार्च में वापस ली गई थी याचिका

इस मुद्दे पर पहले भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। मार्च 2026 में उस याचिका को वापस ले लिया गया था। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को व्यापक दायरे के साथ दोबारा अदालत का रुख करने की स्वतंत्रता दी थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि इस बार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा और एक्स को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है। उन्होंने कहा, ‘आपको याद होगा, हम मार्च में इस मुद्दे पर आए थे।’ उन्होंने बताया कि दोनों प्लेटफॉर्म की मौजूदा नीतियों में इस तरह की सामग्री से निपटने के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं।

CJI सूर्यकांत ने कहा- यह जरूरी है

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने इस दलील पर कहा कि इन प्लेटफॉर्म की नीतियों को भी मामले में शामिल करना जरूरी है। वकील ने कोर्ट को बताया कि अलग-अलग हाईकोर्ट पहले ही इस संबंध में कुछ दिशानिर्देश जारी कर चुके हैं, लेकिन पूरे देश के लिए ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जो व्यवहारिक और प्रभावी हो। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि नोटिस जारी किया जाए। हालांकि, CJI ने साथ ही सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री के प्रसार को नियंत्रित करने की व्यावहारिक चुनौती की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि समस्या यह है कि इसे नियंत्रित करना आसान नहीं है, क्योंकि सोशल मीडिया कोई ऐसी सीमा नहीं है जिसे बंद किया जा सके। मामले में सुप्रीम कोर्ट अब केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगेगा।फांसी देने के वैकल्पिक तरीके की मांग वाली अर्जी खारिज

मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने के वैकल्पिक तरीके की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका में दलील दी गई थी कि फांसी देना मौत की सजा देने का एक दर्दनाक तरीका है। हालांकि, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि इस याचिका का खारिज होना केंद्र सरकार के रास्ते में बाधा नहीं बनेगा, अगर सरकार मृत्युदंड के तरीकों की व्यापक समीक्षा करना चाहती है और इसके निष्पादन के लिए किसी अधिक सम्मानजनक या वैकल्पिक तरीके को अपनाना चाहती है।

हमारे सामने फिर आ सकता है यह मामला-SC

सुप्रीम कोर्ट ने आज मौत की सजा के लिए फांसी देने की मौजूदा व्यवस्था खत्म करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि याचिका खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में इस व्यवस्था की संवैधानिक समीक्षा नहीं हो सकती। अगर नए और ठोस मेडिकल या वैज्ञानिक सबूत सामने आते हैं, जिनसे यह साबित हो कि फांसी के तरीके पर दोबारा विचार करने की जरूरत है, तो मामला फिर अदालत के सामने आ सकता है।

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