नई दिल्ली: 6 जनवरी, 2004 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर सुबह-सुबह ही एक रेहड़ी पर लोगों का हुजूम जमा था। उत्सुकतावश मैं भी उस पर चला गया। रेहड़ी पर लाल रंग के रुमाल बिक रहे थे। पर, लोग इसे खरीद क्यों रहे हैं? वह ऑस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव वॉ के आखिरी टेस्ट का आखिरी दिन था। वॉ का रूमाल। स्टीव वॉ बैटिंग करने आते, तो जेब में एक लाल रुमाल रखते थे। कहते हैं कि उनकी दादी ने उन्हें भेंट किया था। वॉ उसे अपना लकी चार्म मानते। बैटिंग के समय उनकी बाईं जेब में रखे रुमाल का एक सिरा बाहर रहता।
शानदार कप्तान थे स्टीव वॉ
विश्व विजेता टीम की नींव रखने वाले वॉ ने लगातार 16 टेस्ट मैच जीते थे। 57 टेस्ट मुकाबलों में कप्तानी करने वाले वॉ को 41 बार जीत मिली। उस सीरीज के ऐन पहले, नवंबर 2003 में वॉ ने संन्यास की घोषणा कर दी थी। इसीलिए, उनके प्रशंसक भी आखिरी पारी में उनको सलामी देने के लिए लाल रूमाल लेकर स्टेडियम पहुंचे थे। उनमें मैं भी शामिल था। लारा ने चौंकाया। 3 बरस बाद एक और खिलाड़ी ने क्रिकेट जगत को अलविदा कहा। कैरेबियाई धरती पर हुए 2007 के विश्व कप में भारतीय टीम पहले राउंड में ही बाहर हो गई। मेजबान वेस्टइंडीज ने सुपर 8 के मुकाबले में बांग्लादेश को हरा दिया। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान ब्रायन लारा ने हल्के अंदाज में कह दिया कि मैं शनिवार को अपना आखिरी मुकाबला खेलूंगा। यह सुन सब भौंचक्के रह गए। फिर, त्रिनिदाद के किंग के आखिरी मैच में सलामी देने हजारों दर्शक स्टेडियम पहुंचे।










































