जनसुनवाई में कलेक्टर को सौंपा आवेदन
100-150 वर्षों से चली आ रही परंपरा का हवाला
आलेझरी के ग्रामीणों ने पंचायत पर लगाया मनमानी का आरोप
बालाघाट। जनपद पंचायत वारासिवनी के अंतर्गत ग्राम आलेझरी में गोवारी समाज के पारंपरिक खिलिया मुठया (गोठान) की भूमि पर ग्राम पंचायत द्वारा उद्यान बगीचा निर्माण कराए जाने का मामला सामने आया है। निर्माण कार्य का विरोध करते हुए गोवारी समाज के दो दर्जन से अधिक लोगों ने मंगलवार को बालाघाट कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जनसुनवाई में हस्ताक्षरयुक्त आवेदन सौंपा और निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
गोवारी समाज के लोगों ने आवेदन में बताया कि ग्राम की आबादी भूमि पर पूर्व से भगवान कृष्ण का मंदिर स्थित है। इसी मंदिर के समीप गोवारी समाज के आराध्य देव खिलिया मुठया जिसे समाज पारंपरिक गोठान के रूप में मानता है की जगह भी स्थित है। समाज का दावा है कि उक्त स्थान पर उनके पूर्वजों के समय से करीब 100 से 150 वर्षों से परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना और गोठान संबंधी गतिविधियां होती आ रही हैं। इसी स्थान के समीप शासकीय पशु चिकित्सालय भी बना हुआ है।
समाज के लोगों का आरोप है कि ग्राम पंचायत आलेझरी के सरपंच एवं कार्यकारी सदस्यों द्वारा उक्त स्थान से कृष्ण मंदिर और खिलिया मुठया की जगह को हटाकर वहां उद्यान बगीचा बनाने की घोषणा की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पंचायत को आवेदन देकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया।आवेदन में पंचायत प्रतिनिधियों पर कथित तौर पर गोवारी समाज की परंपरागत भूमि पर अधिकार को नकारने का भी आरोप लगाया गया है। समाज के लोगों का कहना है कि यदि पंचायत को विकास कार्य करना है तो समाज की धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक स्थान पर उद्यान का निर्माण किया जाए।लेकिन खिलिया मुठया एवं कृष्ण मंदिर को हटाकर निर्माण कार्य न कराया जाए।
हनवासी सहारे ने बताया कि आलेझरी गांव में गोवारी समाज का गोठान करीब 100 वर्ष से भी अधिक समय से है। समाज के लोग हर वर्ष इसी स्थान पर परंपरा के अनुसार गाय खिलाते हैं। यह परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि गोठान की जगह पर गार्डन बनाए जाने से समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा प्रभावित होगी।वहीं गोवर्धन राऊत ने कहा कि गोवारी समाज के गोठान की जगह पर पंचायत द्वारा गार्डन का निर्माण कराया जा रहा है। उनके अनुसार यह स्थान समाज की पुरानी परंपरा से जुड़ा है और यहां प्रतिवर्ष गाय खिलाने की रस्म निभाई जाती है। उन्होंने मांग की कि उक्त स्थान पर गोठान को यथावत रखा जाए।
गोवारी समाज के लोगों ने कलेक्टर से मामले की जांच कराते हुए उद्यान-बगीचा निर्माण कार्य पर रोक लगाने खिलिया मुठया (गोठान) एवं कृष्ण मंदिर को सुरक्षित रखने तथा समाज की वर्षों पुरानी परंपरा को बनाए रखने की मांग की है।










































