बीजिंग: तिब्बत के पठार को ‘दुनिया की छत’ या ‘एशिया का वॉटर टावर’ कहा जाता है। 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तिब्बती पठार एशिया की कई बड़ी नदियों का स्रोत है। लेकिन हाल के वर्षों में इसे नया नया नाम मिला है- एशिया का पावर टावर, क्योंकि जहां जल विद्युत पैदा करने की बड़ी क्षमता मौजूद है। अब चीन यहां दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बना रहा है। यारलुंग त्सांग नदी पर बन रहे इस बांध को मोटुओ या मेडोग मेगा डैम प्रोजेक्ट के नाम से जाना जाता है।
इस मेगा डैम का निर्माण जुलाई 2025 में शुरू किया गया था और इसमें 168 अरब डॉलर की भारी लागत का अनुमान है। इसकी विशालता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अनुमानित 300 टेरावाट सालाना बिजली उत्पादन क्षमता के साथ यह दुनिया की सभी जल-बिजली परियोजनाओं को पीछे छोड़ देगा।










































