तीन बच्चों की मौत के बाद जागा प्रशासन, अडोरी के गांवों में स्वास्थ्य अलर्ट,कुंडेकसा और बोंदारी में वायरल बीमारी के बीच स्वास्थ्य शिविर शुरू, अंधविश्वास के कारण समय पर इलाज नहीं मिलने की आशंका,

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बिरसा तहसील की ग्राम पंचायत अडोरी के अंतर्गत आने वाले कुंडेकसा और बोंदारी गांव इन दिनों बच्चों में फैल रही रहस्यमयी बीमारी को लेकर दहशत में हैं। बीते 15 से 20 दिनों के भीतर तीन मासूम बच्चों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि बीमारी फैलने के बावजूद कई परिवार आज भी अस्पताल का रुख करने के बजाय झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र का सहारा ले रहे हैं। लगातार मौतों के बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा, जिसके बाद कलेक्टर मृणाल मीणा के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और प्रभावित गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाकर घर-घर स्वास्थ्य परीक्षण शुरू कराया गया।

ग्राम पंचायत अडोरी के सरपंच परशुराम धुर्वे ने बताया कि पिछले कई दिनों से पंचायत के कुंडेकसा, बोंदारी सहित आसपास के गांवों में छोटे बच्चों के शरीर पर लाल दाने निकलने, तेज बुखार, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कई बच्चों की तबीयत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने और अंधविश्वास के कारण स्थिति गंभीर होती चली गई। उन्होंने बताया कि अब तक तीन मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जिससे पूरे इलाके में भय और चिंता का माहौल है। जानकारी के अनुसार बोंदारी गांव निवासी सोमारू धुर्वे की तीन वर्षीय पुत्री लमिया धुर्वे और एक वर्षीय पुत्र संतोष धुर्वे की बीमारी के चलते मौत हो गई। इसी प्रकार कुंडेकसा गांव निवासी नेहरू मरकाम की तीन वर्षीय पुत्री प्रती मरकाम ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। लगातार तीन बच्चों की मौत के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि अभी भी गांव में कई बच्चे बीमार हैं। अधिकांश बच्चों के शरीर पर दाने निकल रहे हैं और उन्हें तेज बुखार आ रहा है। कई परिवारों ने बच्चों का इलाज कराया है, लेकिन कुछ लोग अब भी पारंपरिक झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र के भरोसे बैठे हैं। यही कारण है कि बीमारी को लेकर ग्रामीणों में डर और असमंजस दोनों बना हुआ है।सरपंच परशुराम धुर्वे ने बताया कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और जागरूकता के अभाव के कारण कई लोग समय रहते अस्पताल नहीं पहुंचते। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआत में ही सभी मरीजों का चिकित्सकीय उपचार कराया जाता तो शायद इतनी गंभीर स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने प्रशासन से गांवों में लगातार स्वास्थ्य निगरानी रखने और जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है। तीन बच्चों की मौत की सूचना मिलते ही कलेक्टर मृणाल मीणा ने स्वास्थ्य विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद चिकित्सा विभाग की टीमों ने अडोरी पंचायत के प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर बच्चों की जांच शुरू की, दवाइयों का वितरण किया और गंभीर मरीजों को अस्पताल भेजने की व्यवस्था की। स्वास्थ्य अमला लगातार गांवों में निगरानी बनाए हुए है ताकि बीमारी का फैलाव रोका जा सके। लगातार तीन मासूमों की मौत ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और अंधविश्वास के बीच चल रही लड़ाई को उजागर कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग बीमारी पर कितनी जल्दी नियंत्रण पा पाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

प्रभावित गांवों में मेडिकल टीम तैनात है – परेश उपलव

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलव ने बताया कि विभाग को तीन बच्चों की मौत और कई बच्चों के बीमार होने की सूचना मिली थी। प्रारंभिक जांच में क्षेत्र में वायरल फीवर के मामले सामने आए हैं, हालांकि बीमारी के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच भी कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है और प्रभावित गांवों में लगातार मेडिकल टीम तैनात है। सीएमएचओ ने ग्रामीणों से स्पष्ट अपील की कि बच्चे को बुखार, शरीर पर दाने, कमजोरी या किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या अंधविश्वास का सहारा न लें। ऐसे मामलों में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचें, क्योंकि समय पर उपचार ही बच्चों की जान बचा सकता है।

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