भोपाल । राजधानी में वायु प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नगर निगम, जिला प्रशासन और मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) को तत्काल प्रभाव से प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू करने के लिए कहा है।
न्यायाधिकरण ने कहा कि खराब होती वायु गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) की निगरानी में किसी भी तरह की हेराफेरी पर रोक लगाने को कहा है।
तैयार करें संयुक्त प्लान
एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने शुक्रवार को गौरव सक्सेना बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य की सुनवाई के बाद न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति एसके सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने आदेश जारी किया।
एनजीटी ने नगर निगम आयुक्त, कलेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए कि वे शहर में धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और अन्य प्रदूषण स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार करें तथा उसकी नियमित निगरानी भी सुनिश्चित करें।
एक्यूआई के आंकड़ों में हेराफेरी
अधिकरण ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक प्रभाव भी दिखाई देना चाहिए। पीठ ने विशेष रूप से वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों के आसपास अत्यधिक पानी का छिड़काव कर एक्यूआई के आंकड़ों को कृत्रिम रूप से बेहतर दिखाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मानकों के अनुसार ही वास्तविक आंकड़े दर्ज किए जाएं।
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए गए हैं कि वह क्षेत्र की वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी करे, प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की पहचान कर समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे। निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है तो संबंधित इकाइयों और विभागों के खिलाफ अभियोजन या पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जाए।
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बायो-मेडिकल वेस्ट पर जताई आपत्ति
मामले का निराकरण करते हुए एनजीटी ने सभी लंबित अंतरिम आवेदनों का भी निस्तारण कर दिया। स्वच्छ ईंधन अपनाएं औद्योगिक इकाइयांट्रिब्यूनल ने पीपुल्स अस्पताल एवं कालेज परिसर में संचालित कैप्टिव बायो-मेडिकल वेस्ट इन्सिनरेटर पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में इस तरह की सुविधा वायु प्रदूषण का कारण बन सकती है।
इसलिए अस्पताल को तीन माह के भीतर अपने परिसर का इन्सिनरेटर बंद कर 75 किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध कामन इन्सिनरेशन सुविधा से जुड़ने के निर्देश दिए।
वहीं, नर्मदा अमृत दुग्ध सागर प्राइवेट लिमिटेड और भोपाल सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित को बायलर की राख (बायलर ऐश) के उपयोग का समुचित रिकार्ड रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी औद्योगिक इकाइयों को स्वच्छ ईंधन अपनाने और प्रदूषण कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है।










































