अंकारा: तुर्की ने हालिया वर्षों में हथियार बनाने और बेचने के क्षेत्र में तेजी से नाम कमाया है। तुर्की ने मिलिट्री इक्विपमेंट और खासतौर से ड्रोन बनाने में कामयाबी पाई है। तुर्की ने ना सिर्फ अफ्रीका और यूरोप बल्कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और मालदीव जैसे भारत के पड़ोसियों को किलर ड्रोन बेचकर अच्छी-खासी रकम कमाई है। नाटो सदस्य तुर्की आज दुनिया का अहम हथियार निर्यातक बनता जा रहा है। उसने भारत के पड़ोस में तेजी से पकड़ बनाई है।
तुर्की ने भारत के पड़ोस में अपना प्रभाव बढ़ाते हुए मालदीव को ‘बेरक्तार TB2’ हथियारबंद ड्रोन दिए हैं। पाकिस्तान के लिए ड्रोन का मुख्य सप्लायर तुर्की बना हुआ है तो बांग्लादेश के साथ भी हालिया दिनों में तुर्की ने करीबी बढ़ाई है। यरुशलम पोस्ट के एक विश्लेषण के मुताबिक, तुर्की आज के समय में करीब 40 देशों को हथियार सप्लाई करता है। तुर्की ना सिर्फ खाड़ी, अफ्रीका और एशिया बल्कि यूरोप के भी कुछ हिस्सों में ड्रोन बेच रहा है।तुर्की का बढ़ता रक्षा निर्यात
रॉयटर्स की ट्रेड आंकड़ों की समीक्षा से पता चलता है कि तुर्की का डिफेंस एक्सपोर्ट साल 2021 के बाद से तीन गुना ज्यादा बढ़कर 2025 में 10 अरब डॉलर हो गया है। इसमें यूक्रेनी सेना के चर्चित आर्म्ड ड्रोन भी शामिल हैं यह तुर्की की अर्थव्यवस्था के कुल एक्सपोर्ट का तकरीबन 3.7 प्रतिशत होता है।
तुर्की के रक्षा निर्यात में यह बढ़ोतरी घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री के परिपक्व होने को दिखाती है। इसमें ड्रोन बनाने वाली कंपनी बायकर, टर्किश एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और आर्का डिफेंस और काले जैसी कंपनियां शामिल हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि सरकारी समर्थन और लचीली सप्लाई चेन ने इन कंपनियों को पहचान बनाने में मदद की है।










































