बांसी इथेनॉल प्लांट का ग्रामीणों ने किया घेराव

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स्थानीय रोजगार,प्रदूषण और विकास कार्यों की अनदेखी का ग्रामीणों ने लगाया आरोप

पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बांसी स्थित इथेनॉल प्लांट के खिलाफ आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों और युवाओं का गुस्सा फू ट पड़ा। प्लांट प्रबंधन के द्वारा स्थानीय हितों की अनदेखी, पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और रोजगार में प्राथमिकता नही दिए जाने से नाराज ग्रामीणों ने प्लांट का घेराव कर जमकर नारेबाजी की। लिखित आश्वासन नही मिलने के कारण आक्रोशित युवा देर शाम तक प्लांट के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन पर बैठे रहे।

सीएसआर मद व पर्यावरण नियमों की अनदेखी का आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बासी स्थित इथेनॉल प्लांट के निर्माण और संचालन के बाद से आज तक प्रबंधन के द्वारा ग्राम पंचायत व आसपास के क्षेत्रों में कोई सामाजिक कार्य नहीं किया गया। नियमानुसार दिए जाने वाले कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड से ना तो स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए और ना ही ग्रामीण सडक़ों, स्कूलों या स्वास्थ्य केंद्रों के सुधार में कोई पहल की गई। इसके अलावा प्लांट के अपशिष्ट प्रबंधन में भारी अनियमितता सामने आ रही है। प्लांट से निकलने वाला दूषित पानी गांव के पारंपरिक जल स्रोतों, तालाबों और कृषि खेतों को प्रदूषित कर रहा है। पर्यावरण नियमों के तहत परिसर व आसपास ३३ प्रतिशत क्षेत्र लगभग १५०० से २५०० पौधे में वृक्षारोपण किया जाना अनिवार्य है जो धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहा। इससे क्षेत्र में जलवायु प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय रोजगार में अवहेलना और बढ़ते प्रदूषण से परेशान होकर बकेरा, बांसी, पौनेरा, बोदलकसा, बघोली और उमरवाड़ा के ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्लांट परिसर का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्लांट प्रतिनिधियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं और नियमानुसार कार्य करने की अपील की। घेराव के दौरान प्लांट प्रतिनिधि ने दावा किया कि प्लांट में ८५ प्रतिशत स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया गया है,तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़े विकास कार्य संचालन के ३ वर्ष पूरे होने के बाद शुरू किए जाएंगे। हालांकि ग्रामीण प्रबंधन के केवल मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने अपनी सभी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपते हुए समस्याओं के निराकरण के लिए लिखित आश्वासन की मांग की। लिखित में प्रतिबद्धता नही मिलने पर युवाओं का आक्रोश और बढ़ गया और वे शाम तक मुख्य गेट के सामने धरने पर डटे रहे।

बांसी प्लांट में स्थानीय लोगो को नही दिया जा रहा रोजगार-अमित चौरे

ग्रामीण अमित चौर ने बताया कि २ वर्ष में स्वास्थ्य शिविर प्रभावित लोगों के लिए लगाना था जो आज तक नहीं लगा। हमारी सडक़ और वायु दोनों खराब हो गई पर रोजगार हम लोगों को नहीं दिया ८५ प्रतिशत बोल रहे हैं तो यह लिस्ट बताये। परिसर में प्रदूषण रोकने ३३ प्रतिशत पेड़ लगाना अनिवार्य है वह भी नहीं दिख रहे हैं जो फंड होता है उससे हमारे आसपास के किसी ग्राम में कार्य नहीं किया गया है उसमें ३ वर्ष का समय बता रहे हैं। वहीं इनका दूषित पानी पूरा तालाब खेत नहर में जाकर मछली और फ सल दोनों बर्बाद कर रहा हैं। जंगल में यह अपनी राख फेंक रहे हैं अपशिष्ट प्रबंधन उनके पास कुछ नहीं है सागौन के २०० पेड़ काट दिए। बोरा फेंकने के लिए हमारे लोगों को ले रहे हैं इस संबंध में हमने एसडीएम और थाने में भी आवेदन दिया था।

प्लांट को जमीन देने के बाद भी नही मिला रोजगार-शिवनाथ गौतम

ग्रामीण शिवनाथ गौतम ने बताया कि बाहर के लोगों को यहां पर काम दिया जा रहा है और हम लोगों को यहां काम नहीं मिलता। यह प्लांट के स्थान पर मेरी करीब १.४० एकड़ जमीन थी जो मेरे द्वारा प्लांट को दी गयी उस दौरान शर्तों पर यह भूमि दी गई थी हमें राशि तो भूमि की मिली पर एक लिखित अनुबंध स्टांप पर हुआ था जो इन्होंने किया था कि वह हमें नौकरी देंगे। यहां हम दो किसान की जमीन थी बड़ी मुश्किल से हमें नौकरी दिसंबर के अंतिम समय में दी गई और जनवरी में निकाल दिया गया। १५ दिन हमने काम किया निकालने का भी कोई कारण उन्होंने आज तक हमें नहीं दिया अभी भी हमारा अनुबंध हमारे पास है।

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