मॉस्को: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बायो मेडिकल रिसर्च के जरिए ऐसे कार्यक्रम को तरजीह दे रहे हैं, जिसका मकसद इंसान की जिंदगी बढ़ाना है। यह कार्यक्रम 26 अरब डॉलर की सरकारी सहायता से चल रहा है। इसमें जेनोट्रांसप्लांटेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीक और सूअरों के अंदर प्रत्यारोपण योग्य मानव अंगों को विकसित करने के प्रयास शामिल हैं। इस कार्यक्रम का मकसद दीर्घायु की खोज करना है। रूसी वैज्ञानिक इंसान की जिंदगी 150 साल तक करने की कोशिश में हैं।
रूस समर्थित वैज्ञानिक पहल में जीन थेरेपी, अंग मुद्रण, मिनी-पिग अंग संवर्धन (ऑर्गन कल्टीवेशन) और बहुत कम तापमान क्रायोथेरेपी शामिल है। ये सभी नई स्वास्थ्य संरक्षण तकनीक 26 अरब डॉलर की विशाल सरकारी पहल के अंतर्गत हैं। इस कार्यक्रम ने उन अटकलों को हवा दी है, जो दावा करते हैं कि पुतिन लंबा जीवन जीने के प्रति जुनूनी हैं। क्या है रूसी वैज्ञानिकों का प्लान
रूसी सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि वैज्ञानिक दीर्घायु पहल के तहत कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए जीन-थेरेपी उपचार विकसित कर रहे हैं। 23 अप्रैल को रूसी उप विज्ञान मंत्री डेनिस सेकिरिंस्की ने कहा था कि यह दवा उम्र बढ़ने के खिलाफ लड़ाई में सबसे आशाजनक रास्तों में से एक है।
रूसी शोधकर्ता अब बायोप्रिंटिंग यानी जिंदा टिश्यू की 3डी प्रिंटिंग के साथ जेनोट्रांसप्लांटेशन पर काम कर रहे हैं, जो आनुवंशिक रूप से संशोधित मिनी-पिग के अंदर मानव अंगों को विकसित करने की प्रक्रिया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि मानव उपास्थि ऊतक और चूहे की थायरॉइड ग्रंथि को बायोप्रिंट कर लिया है। उनका लक्ष्य 2030 तक पूरी तरह से इंसान का ऑर्गन ट्रांसप्लांट करना है।










































