पिछले एक साल में शेयर बाजार निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इसकी कई वजह रही है। अमेरिका द्वारा भाारत पर भारी टैरिफ लगाना, ईरान युद्ध और कंपनियों के कमोजर नतीजे। इसके चलते बहुत सारे निवेशकों के पोर्टफोलियो रेड में है। अगर आप भी उन निवेशकों में शामिल हैं तो इस घाटे की भरपाई आप टैक्स छूट पाने के लिए कर सकते हैं। हम आपको बता रहे हैं कि ‘टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग’ का वो तरीका, जिसका इस्तेमाल कर आप शेयरों, इक्विटी म्यूचुअल फंड, ETF और दूसरी कैपिटल एसेट्स से हुए नुकसान का इस्तेमाल करके भविष्य या मौजूदा कैपिटल गेन्स टैक्स का बोझ कम कर सकते हैं।
कैपिटल लॉस को 8 वर्षों तक आगे ले जाना
अगर किसी वित्तीय वर्ष में कैपिटल लॉस, लाभों से अधिक हो जाती हैं, तो इन हानियों को 8 वर्षों तक आगे ले जाया जा सकता है। इस लाभ का दावा करने के लिए, करदाताओं को अपनी आयकर विवरणी (ITR) में निर्धारित तिथि से पहले इन हानियों की घोषणा करनी होगी। इस प्रकार आगे ले जाई गई हानियों को, बाद के वर्षों में पात्र पूंजीगत लाभों के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है, जिससे निवेशकों को समय के साथ अपनी कर दक्षता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG)
12 महीने या उससे कम समय के लिए रखे गए इक्विटी शेयर STCG के दायरे में आते हैं, जिन पर इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 111A के तहत 20% टैक्स लगता है। निवेशक शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस को STCG और LTCG, दोनों के मुकाबले एडजस्ट कर सकते हैं। यह टैक्सेबल गेन्स को कम करने और टैक्स देनदारी को ऑप्टिमाइज करने का एक असरदार तरीका है।
दीर्घकालिक पूंजी लाभ (LTCG)
12 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए इक्विटी शेयर LTCG (लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन) के दायरे में आते हैं। लिस्टेड इक्विटी शेयरों और इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंडों की बिक्री से होने वाला 1.25 लाख रुपये से ज्यादा का प्रॉफ़िट, बिना इंडेक्सेशन बेनिफिट के 12.5% की दर से टैक्स के दायरे में आता है। हालांकि, लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस की भरपाई सिर्फ LTCG से ही की जा सकती है, जिससे टैक्स लगने वाली रकम कम हो जाती है।
आयकर की धारा 112A के तहत, हर फाइनेंशियल ईयर में 1.25 लाख रुपये तक का LTCG टैक्स से पूरी तरह छूट के दायरे में आता है। इसलिए, लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस का इस्तेमाल करने से पहले, निवेशकों को यह पता लगा लेना चाहिए कि उनका LTCG इस छूट की सीमा के अंदर आता है या नहीं, क्योंकि इस सीमा से कम का प्रॉफिट टैक्स के दायरे में नहीं आता है। इससे यह पक्का होता है कि कैपिटल लॉस का इस्तेमाल सही तरीके से हो, जिससे ज्यादा से ज्यादा टैक्स बचाया जा सके।
टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग के लिए मुख्य बातें
जहां शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस को STCG और LTCG दोनों के मुकाबले एडजस्ट किया जा सकता है, वहीं लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस को सिर्फ LTCG के मुकाबले ही एडजस्ट किया जा सकता है। इस अंतर को देखते हुए, टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-term, दोनों तरह के कैपिटल गेन्स पर टैक्स देनदारियों को मैनेज करने का एक असरदार तरीका है। इनकम-टैक्स एक्ट के तहत सेट-ऑफ के नियमों का समझदारी से इस्तेमाल करके, निवेशक टैक्स की बचत को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं और कैपिटल गेन्स टैक्स का बोझ कम कर सकते हैं।










































