तेहरान/रियाद: ईरान के साथ 39 दिनों तक लड़ने के बाद आखिरकार अमेरिका ने तेहरान की शर्तों पर समझौता कर लिया है। ईरान इस युद्ध के बाद एक ऐसे देश के तौर पर ऊभरा है जिसने सुपरपावर अमेरिका को जंग से भागने पर मजबूर कर दिया, जिसने इजरायल के वर्षों से बनाए छद्मजाल को तोड़ दिया और जिसने मिडिल ईस्ट की हर एक शक्ति पर हमले किए। अमेरिका के इस युद्ध से भागने के दूरगामी असर पड़ेंगे और सबसे बड़ा सवाल ये है कि ईरान और सऊदी अरब के बीच इस्लामिक दुनिया का असली सुल्तान कौन होगा।
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत पर भयानक मिसाइल हमले किए। उसने खाड़ी देशों की ऊर्जा सप्लाई को रोक दिया। ईरानी मिसाइल हमलों से इन देशों में मौते हुईं लेकिन ईरान अपने बदले के अधिकार के साथ अडिग रहा। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के कुछ सदस्यों खासकर कतर ने इस समझौते तक पहुंचने में मध्यस्थ के तौर पर अहम भूमिका निभाई है।










































