अल नीनो इफेक्ट को लेकर नई रिपोर्ट, मौसम से लेकर महंगाई पर कितना असर, जान लीजिए ताजा अपडेट

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नई दिल्ली: एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जून-अगस्त के दौरान अल नीनो की घटना होने की संभावना 80 फीसदी है और कम से कम नवंबर तक इसके बने रहने की संभावना 90 फीसदी या उससे अधिक है। हालांकि, देश में जलाशयों का जलस्तर सामान्य भंडारण से अधिक है। और सब्जियों की आवक के आंकड़े भी संतोषजनक हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले दिनों में ही पता चलेगा कि क्या सप्लाई की स्थिति ऐसी है जो खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में अचानक होने वाले बदलावों से महंगाई पर पड़ने वाले असर को संभाल पाएगी या नहीं।

BoB की रिसर्च रिपोर्ट में क्या कहा, बड़ी बातें

  • अर्थशास्त्री दिपान्विता मजूमदार के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में सीपीआई महंगाई दर 5.2 फीसदी से 5.5 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है।
  • यह अनुमान अल नीनो के कुछ असर और कच्चे तेल की औसत कीमत 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना पर आधारित है।
  • मई 2026 में हेडलाइन सीपीआई महंगाई दर 3.9 फीसदी रही, जो बीओबी रिसर्च के 4.1 फीसदी के अनुमान से कम थी।
  • हालांकि, अप्रैल के 3.5 प्रतिशत से ज्यादा थी। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में तेजी थी।
  • खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर बढ़कर 4.8 फीसदी हो गई।
  • हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ट्रांसपोर्ट से जुड़ी महंगाई दर बढ़ी, जबकि रेस्टोरेंट और रहने-ठहरने की सेवाओं की महंगाई दर में भी बढ़ोतरी हुई।
  • कोर महंगाई दर (खाने-पीने की चीजों और ईंधन को छोड़कर) बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गई, जो कीमतों में अंदरूनी दबाव के संकेत हैं।

रिसर्च में मौसम, महंगाई को लेकर अहम फैक्ट्स

बीओबी रिसर्च को ईंधन की ज्यादा कीमतों और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं, खासकर अल नीनो की वजह से खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना से महंगाई का जोखिम दिख रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई के मामले में, ईंधन की ज्यादा कीमतों का असर और माल ढुलाई (फ्रेट) की लागत में संभावित बढ़ोतरी से निकट भविष्य में महंगाई और बढ़ सकती है। इसलिए, ‘सेकंड-राउंड पास-थ्रू’ (यानी लागत बढ़ने का कीमतों पर बाद में पड़ने वाला असर) पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है, खासकर तब जब इस साल मौसम से जुड़े जोखिम ज्यादा हैं।

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