ओडिशा के कॉन्स्टेबल ने की कुख्यात गांजा तस्कर की मुखबिरी? एमपी के छुहिया घाटी से अपने आका को छुड़ा ले गए थे बदमाश

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मध्य प्रदेश के सीधी जिले में ओडिशा पुलिस की टीम पर हुए हमले और 1.5 करोड़ रुपये के गांजा तस्कर के कस्टडी से फरार होने के मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि तस्कर के मूवमेंट और रूट की गोपनीय जानकारी लीक कैसे हुई। इस सनसनीखेज वारदात में एक पुलिसकर्मी घायल भी हुआ है।सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में ओडिशा पुलिस की टीम पर हुए जानलेवा हमले और गिरफ्त से ड्रग तस्कर के फरार होने के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब पुलिस महकमे के भीतर ही मूवमेंट की जानकारी लीक होने के एंगल से जांच शुरू कर दी गई है।

क्या था पूरा मामला?

कंधमाल जिले की पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर और छह सशस्त्र कांस्टेबल 28 वर्षीय ड्रग तस्कर आदित्य मिश्रा उर्फ राकेश उर्फ सावरिया को स्थानीय अदालत में पेशी के लिए रीवा ले जा रहे थे। इसी दौरान मध्य प्रदेश के सीधी जिले के अंतर्गत आने वाली छुहिया घाटी के पास सशस्त्र अपराधियों ने पुलिस टीम पर अचानक हमला बोल दिया और तस्कर को छुड़ाकर ले गए।कंधमाल पुलिस ने इस आरोपी को बीते 30 जून को रीवा जिले से ही गिरफ्तार किया था। इससे पहले 2 जून को पुलिस ने गोछापाड़ा इलाके से एक ट्रक पकड़ा था, जिसमें करीब 1,470 किलोग्राम गांजा भरा था जिसकी अनुमानित कीमत 1.5 करोड़ रुपये थी। उस दौरान मध्य प्रदेश के देवास जिले के रहने वाले ट्रक ड्राइवर योगेश मीणा (42) को गिरफ्तार किया गया था। ड्राइवर से मिली जानकारी के आधार पर ही पुलिस ने रीवा में छापेमारी कर आदित्य मिश्रा को दबोचा था।

‘इन्फो लीक’ और आंतरिक जांच

घटना के बाद ओडिशा पुलिस ने स्थिति का जायजा लेने के लिए अधिकारियों की एक विशेष टीम मध्य प्रदेश भेजी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘इस हमले में घायल हुआ एक कांस्टेबल अब खतरे से बाहर है और उसकी स्थिति स्थिर है। मध्य प्रदेश पुलिस इस हमले और आरोपी के फरार होने की जांच कर रही है, जबकि हम इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि मिश्रा के मूवमेंट की गोपनीय जानकारी लीक कहां से हुई थी। संभावित लीक के स्रोत की जांच की जा रही है।’

ओडिशा पुलिस के मुताबिक, मंगलवार को होने वाली कोर्ट पेशी की जानकारी पहले ही रीवा पुलिस को दे दी गई थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश के भीतर आवाजाही के दौरान केवल उनकी ही पुलिस टीम मौजूद थी, जिसके चलते अब मुखबिरी और अंदरूनी सूचना तंत्र की सुई घूम रही है।

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