कृषि कार्य शुरू होते ही डीजल की किल्लत, ट्रैक्टर चालकों और किसानों में भारी आक्रोश

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पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। क्षेत्र में मानसूनी बारिश की दस्तक से ठीक पहले जहां एक ओर किसानों ने खरीफ सीजन की तैयारियों के तहत खेतों की सफाई और जुताई का कार्य शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी ओर डीजल की भारी किल्लत ने उनकी चिंताओं को बढ़ा दिया है। वर्तमान में कृषि यंत्रों के संचालन के लिए पर्याप्त ईंधन न मिलने से ट्रैक्टर चालक बेहद परेशान हैं। जबकि वर्तमान समय में सभी किसान परंपरागत खेती को छोडक़र पूरी तरह से ट्रैक्टर, रोटावेटर और कल्टीवेटर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों पर निर्भर हो चुके है और इन आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से कृषि कर रहे है। ये यंत्र डीजल से ही चलते है, लेकिन वर्तमान समय में डीजल की किल्लत बढ़ गई है। वहीं प्रशासन के द्वारा डिम्बों में डीजल देने पर रोक लगा दिया हैै जिसके कारण पेट्रोल पंपों में डिम्बों में डीजल नही मिल रहा है। ऐसी स्थिति में ट्रैक्टर मालिक व चालक ट्रैक्टर लेकर पेट्रोल पंप डीजल भरवाने के लिए पहुंच रहे है। जिससे पेट्रोल पंप में ट्रैक्टरों की लंबी लाईन लग गई और कुछ अव्यवस्था होने से पेट्रोल के कर्मचारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही नगर मुख्यालय के कुछ पेट्रोल पंपों में डीजल भी खत्म हो चुका है। जिसकी जानकारी लगते ही जिस पेट्रोल पंप में डीजल मिल रहा है उस स्थान पर क्षेत्र के ट्रैक्टर संचालक ट्रैक्टर व डिम्बा लेकर डीजल के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे जिससे एकाएक मानपुर स्थित पेट्रोल पंप में भीड़ लग गई। वहीं पर्याप्त मात्रा में डीजल नही मिलने के कारण ट्रैक्टर संचालकों को खासा परेशानियो का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है, जिससे किसानों में शासन और प्रशासन के प्रति रोष देखा जा रहा है। किसानों एवं ट्रैक्टर मालिकों ने शासन-प्रशासन से पेट्रोप पंपों में स्टाक रखकर पर्याप्त मात्रा में डीजल डिम्बों में देने की मांग की है।

परंपरागत से आधुनिक खेती की ओर बढ़े, पर अब ईंधन का संकट

गौरतलब है कि सरकार पिछले कई वर्षों से लगातार आधुनिक खेती को बढ़ावा दे रही है। सरकार की अपीलों और सहूलियतों के बाद अब क्षेत्र का आम किसान भी अपनी परंपरागत खेती (बैलों के माध्यम से) को छोडक़र पूरी तरह से ट्रैक्टर, रोटावेटर और कल्टीवेटर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों पर निर्भर हो चुका है। वर्तमान में बारिश का समय नजदीक है और यह समय किसानों के लिए बेहद मूल्यवान है। यदि सही समय पर खेतों की जुताई न हुई, तो बुआई प्रभावित होना तय है। ऐसे समय पर डीजल की किल्लत ने किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। वहीं ट्रैक्टर संचालकों और किसानों के सामने सबसे व्यावहारिक समस्या पेट्रोल पंपों पर डिब्बों (कैन) में डीजल देने पर लगा प्रतिबंध है। किसानों का कहना है कि कई बार खेत में काम करते समय अचानक ट्रैक्टर या अन्य कृषि यंत्रों का ईंधन खत्म हो जाता है। भारी-भरकम कृषि उपकरणों को लेकर बार-बार पेट्रोल पंप तक आना संभव नहीं होता। ऐसे में डिब्बे या जरकीन में ईंधन लाकर ही वाहनों में डाला जाता है। लेकिन पेट्रोल पंपों द्वारा डिब्बों में डीजल देने पर रोक लगा दी गई है। इस प्रतिबंध के कारण दूर-दराज के खेतों में चल रहे ट्रैक्टर जहां के तहां खड़े हो जायेगें और किसान ईंधन के लिए भटकने को मजबूर हैं। क्षेत्र के किसानों और ट्रैक्टर मालिकों ने जिला प्रशासन और शासन से गुहार लगाई है कि जब तक कृषि कार्य (जुताई और बुआई) का सीजन चल रहा है, तब तक डीजल की आपूर्ति सुचारू की जाये। साथ ही किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए डिब्बों में डीजल न देने संबंधी कड़े नियमों में अस्थाई रूप से शिथिलता (ढील) बरती जाये। ताकि खेतों में खड़े वाहनों तक ईंधन पहुंचाया जा सके और कृषि कार्य प्रभावित न हो सके।

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