आईफोन या कोई महंगा स्मार्टफोन खरीदने से पहले केवल मासिक EMI न देखें। फोन की कुल कीमत, डिस्काउंट, प्रोसेसिंग फीस, GST, डाउन पेमेंट और मौजूदा EMI को जोड़कर पूरा हिसाब लगाया जाना जरूरी है।आज के समय में महंगा फोन खरीदने के लिए हाथ में मोटी रकम होना जरूरी नहीं रह गया है। महंगे स्मार्टफोन की खरीदारी को आसान बनाने के लिए ही कंपनियों की ओर से नो-कॉस्ट ईएमआई (No-Cost EMI) का ऑप्शन दिया जाता है। इसमें हर महीने छोटी रकम चुकाने का विकल्प देखकर ग्राहक को लगता है कि फोन बजट में आ गया है। लेकिन क्या No-Cost EMI हकीकत में बिना किसी अतिरिक्त खर्च के होती है? अगर आप भी आईफोन EMI पर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो खरीदारी से पहले कुछ जरूरी बातों को समझना बेहद जरूरी है-
क्या सचमुच सस्ता हो जाता है फोन
iPhone 18 Pro के 256GB मॉडल का ही उदाहरण लें तो इस फोन की कीमत 1,64,900 रुपये पड़ती है। जबकि कुछ सेलेक्टेड बैंक कार्ड EMI ऑफर के साथ फोन की कीमत कम होकर 1,57,900 रुपये आ जाती है। 6 महीने की No-Cost EMI में मंथली ईएमआई की बात करें तो ये 26,316 रुपये से शुरू होती है। वहीं ज्यादा स्टोरेज वाले मॉडल में EMI काफी बढ़ जाती है। 2TB मॉडल के लिए मंथली किस्त करीब 51,315 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी आपको यहां समझने की जरूरत है कि EMI में पेमेंट बांटने से फोन सस्ता नहीं हो जाता, बल्कि केवल पेमेंट का तरीका बदल जाता है।
No-Cost EMI में भी लग सकते हैं चार्ज
No-Cost EMI का मतलब यह जरूरी नहीं कि आपको किसी भी तरह का अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ेगा। बैंक EMI कन्वर्जन पर प्रोसेसिंग फीस ले सकते हैं, जो 199 से 500 रुपये तक हो सकती है। इसके अलावा ब्याज वाले हिस्से पर 18% GST भी लागू हो सकता है। इसलिए केवल ऐड में दिखाई जा रही EMI रकम देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए।नई ईएमआई बढ़ा सकती है दबाव
कई बार कम EMI देखकर ग्राहक महंगा फोन खरीदने के लिए तैयार हो जाता है। लेकिन अगर आपके पास पहले से टीवी, टैबलेट या दूसरे सामान की EMI चल रही है तो फोन की नई EMI आपके बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। इससे हर महीने बचत और जरूरी खर्चों के लिए उपलब्ध रकम कम हो सकती है।
जरूरी खर्चों को न करें नजरअंदाज
इसके अलावा, क्रेडिट कार्ड से बड़ी खरीदारी करने पर आपकी उपलब्ध क्रेडिट लिमिट भी घट सकती है। उदाहरण के लिए, 1.5 लाख रुपये की लिमिट वाले कार्ड से 90,000 रुपये की खरीदारी करने पर उपलब्ध लिमिट केवल 60,000 रुपये रह जाएगी। इससे अचानक आने वाले मेडिकल या अन्य जरूरी खर्चों के समय परेशानी हो सकती है।







































