Ayatollah Ali Khamenei Funeral: ईरान, इस्लामिक क्रांति के बाद से इस बात पर फोकस रहा है कि हर मौके पर वो अपनी शक्ति, रणनीति और कूटनीतिक का प्रदर्शन इस तरह से करे कि उसका एक खास मतलब निकले- निर्विवाद शिया मुल्क, इस्लामिक शक्ति और पश्चिम से टक्कर लेने वाला। और बात जब ईरान के सुप्रीम लीडर की आती है तो यहां सबकुछ पीछे छूट जाता है। आज जिस तरह से ईरान ने अमेरिका और इजराइल से जंग लड़ा है, नुकसान उठाया है, कोई दूसरा मुल्क होता तो अपने नेता का अंतिम संस्कार चुपचाप कर चुका होता। लेकिन ईरान ने ऐसा नहीं किया, उसने 28 फरवरी से अपने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शव को रखे रहा, अब जब जंग थम गई, तब उनका अंतिम संस्कार करने जा रहा है, वो भी बड़े कूटनीतिक संदेश के साथ।
दो देशों से गुजरेगा खामेनेई का जनाजा
ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए जो रूट तय किया है, उसमें पहली बार है कि जनाजा दो देशों से होकर गुजरेगा। पहला ईरान, दूसरा इराक। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की अंतिम विदाई का खाका महज एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि इस्लामिक गणराज्य की नींव और उसकी विचारधारा का एक जीता-जागता घोषणापत्र जैसा है। उनका जनाजा जिन पांच खास शहरों से होकर गुजरेगा, उनमें से हर एक पड़ाव ईरान की राजनीतिक ताकत, धार्मिक आस्था और रणनीतिक दबदबे की एक अनकही कहानी बयां कर रहा है। अयातुल्ला अली खामेनेई का जनाजा तेहरान से शुरू होगा, फिर कोम, कर्बला, नजफ और आखिर में मशहद में समाप्त होगा। अब सवाल ये है कि ईरान इन पांचों शहरों से जनाजा निकालकर क्या संदेश देना चाहता है, इराक क्यों जा रहा है खामेनेई का जनाजा?









































