‘युद्ध के बीच दुनिया ने देखी हमारी कूटनीति, भारत में 40 मुल्कों से आया तेल’, जानें PM मोदी ने 140 करोड़ देशवासियों को क्यों कहा शुक्रिया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के बालोतरा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उससे पैदा हुए ऊर्जा संकट पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के युद्ध ने 21वीं सदी का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट पैदा किया, लेकिन नए भारत की इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता और प्रभावी रणनीति के कारण देश इस चुनौती से सफलतापूर्वक बाहर निकलने में कामयाब रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हर स्तर पर सही समय पर सही फैसले लिए, संकट का सटीक आकलन किया और संसाधनों के साथ-साथ अपनी कूटनीतिक ताकत का संतुलित इस्तेमाल किया।

‘अफवाह फैलाने वाले डर दिखाते रहे, भारत इतिहास रचता रहा’

प्रधानमंत्री मोदी ने बिना किसी का नाम लिए विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब कुछ ताकतें सार्वजनिक रूप से अफवाहें फैलाने और लोगों में डर पैदा करने में लगी थीं, तब भारत सरकार पूरी गंभीरता, धैर्य और संवेदनशीलता के साथ हालात को संभाल रही थी। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण और कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए हर कदम ने भारत को ऊर्जा संकट से उबारने में अहम भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री के अनुसार, संकट से निपटने के लिए किए गए प्रयास, रणनीति और कूटनीतिक पहल भविष्य में इतिहास के पन्नों में दर्ज होंगे, क्योंकि इस तरह का काम पहले कभी नहीं हुआ था।

अन्य देशों के साथ भारत की मित्रता अमूल्य साबित हुई: पीएम मोदी

पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत में ईंधन की कमी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “लोगों को डराने और गुमराह करने के प्रयास किए गए। राजनीतिक चालें चली गईं। फिर भी दुर्भावनापूर्ण इरादे वाले लोग सफल नहीं हुए। दूरदराज के इलाकों में भी, आपूर्ति को लेकर मामूली दिक्कतों के अलावा कोई बड़ी चुनौती नहीं थी। अकेले अप्रैल से जून के बीच ही कंपनियों को डीजल और पेट्रोल पर 75,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा।

उन्होंने आगे कहा कि इस नुकसान की भरपाई का भार सरकारी खजाने पर पड़ा। हमने उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी भी की, जिससे जनता पर अत्यधिक बोझ न पड़े। युद्ध के इस दौर में ही अन्य देशों के साथ भारत की मित्रता अमूल्य साबित हुई। संकट शुरू होने से पहले, भारत केवल पच्चीस या छब्बीस देशों से ईंधन और ऊर्जा आयात करता था। हालांकि, इस संकट ने भारतीय कूटनीति की क्षमता को उजागर किया। युद्ध के बीच ही, भारत ने चालीस से अधिक देशों से ईंधन प्राप्त करना शुरू कर दिया। भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्रीय हित और अपने नागरिकों का कल्याण सर्वोपरि है।”

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