यूपीआई भारत में डिजिटल पेमेंट का एक सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। हर दूसरा व्यक्ति यूपीआई का इस्तेमाल कर रहा है। इस बीच 3000 रुपये से अधिक की यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate) वसूले जाने से एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यूपीआई का इस्तेमाल पहले की तरह ही लोकप्रिय रहेगा या इसे इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की संख्या घट जाएगी?
घट कर आधे रह जाएंगे यूपीआई यूजर
भारत के कम्युनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म LocalCircles के एक हालिया राष्ट्रव्यापी सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे के मुताबिक, अगर बड़े मर्चेंट्स 3,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या ट्रांजैक्शन फीस लगाते हैं और इसे ग्राहकों से वसूलते हैं तो आधे से अधिक यानी 10 में से 5 यूजर यूपीआई का इस्तेमाल करना बंद कर देंगे।
क्रेडिट-डेबिट कार्ड का बढ़ जाएगा इस्तेमाल
लोकलसर्कल्स ने देश भर के 322 जिलों से 45,000 से अधिक यूजर्स के विचार, सर्वे के माध्यम से जुटाए हैं। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि सरकार बड़े मर्चेंट्स पर 3,000 रुपये से अधिक के यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर की अनुमति देती है तो 27% यूजर क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का रुख करेंगे, 14% डेबिट कार्ड (Debit Card) पर शिफ्ट होंगे और 12% कैश या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल करेंगे। कुल मिलाकर 53% लोग यूपीआई (UPI) से दूरी बना सकते हैं, जबकि केवल 12% यूजर ही इस शुल्क को वहन कर यूपीआई का इस्तेमाल जारी रखेंगे।
बड़ी ट्रांजैक्शन के लिए नहीं इस्तेमाल होगा UPI
अगर मर्चेंट इस शुल्क को सीधे ग्राहकों से वसूलते हैं तो 48% यूजर 3,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन से पूरी तरह बचेंगे। वहीं, 21% यूजर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क वाले दूसरे डिजिटल माध्यमों का विकल्प चुनेंगे और 14% ऐसे दुकानदारों से खरीदारी बंद कर देंगे जो शुल्क वसूलते हैं। केवल 2% लोग ही शुल्क देकर यूपीआई का इस्तेमाल जारी रखेंगे।
यूपीआई का क्यों घट जाएगा इस्तेमाल
इसे एक उदाहरण से समझें तो मान लीजिए आप UPI के जरिए 10,000 का एयरलाइन टिकट खरीदते हैं। अगर भविष्य में बड़े कारोबारियों पर UPI भुगतान के लिए 3% तक का MDR लागू होता है और एयरलाइन कंपनी इस अतिरिक्त शुल्क को ग्राहकों से वसूलती है तो आपको टिकट के लिए 10,300 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं। ऐसे में ग्राहक UPI की बजाय क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग का विकल्प चुनेंगे, क्योंकि इन माध्यमों से उन्हें अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा। इतना ही नहीं, कई क्रेडिट कार्ड पर कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट्स और अन्य ऑफर्स भी मिलते हैं, जिससे ग्राहकों की अधिक बचत हो सकती है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, कई महीनों से चल रही अटकलों के बीच केंद्र सरकार अब यूपीआई से होने वाले कुछ डिजिटल पेमेंट पर शुल्क (MDR) लगाने का रास्ता साफ कर चुकी है। हालांकि यह शुल्क आम लोगों पर नहीं, बल्कि 50 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाले बड़े व्यापारियों (Large Merchants) पर लागू हो सकता है। वित्त मंत्रालय ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को बड़े कारोबारियों से UPI और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट पर Merchant Discount Rate (MDR) वसूलने की अनुमति मिल सकती है। अब तक इन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट्स पर कोई बैंक शुल्क नहीं लगाया जाता था।
हालांकि सरकार और वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर मुख्य रूप से मर्चेंट की लागत है और उपभोक्ताओं पर सीधा शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है, लेकिन इस बात की आशंका बनी हुई है कि बड़े व्यापारी इस लागत को ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसफर कर सकते हैं।
क्यों पड़ रही इस बदलाव की जरूरत
संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति (Standing Committee on Finance) ने मार्च 2026 की अपनी रिपोर्ट में कहा था कि MDR नहीं होने से UPI इकोसिस्टम लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ (Financially Unsustainable) नहीं रह सकता। यही वजह है कि अब बड़ी यूपीआई पेमेंट्स पर MDR वसूले जाने की तैयारी हो चुकी है।










































