भारतीय GDP को रफ्तार देने में मैन्युफैक्चरिंग, बिजली और गैस जैसे कोर सेक्टर्स का बड़ा हाथ रहा, जिन्होंने करीब 9% की वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की। वहीं, फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर ग्रोथ के साथ सबसे आगे रहे।अमेरिका-ईरान के बीच पिछले छह महीने से जारी युद्ध और अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल चुकी है। तेल-गैस की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक महंगाई को बढ़ा दिया है और दुनिया पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध ने खाद्य संकट की आशंका को और गहरा कर दिया है। लेकिन इन सब के बीच, भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी ताकत दिखाते हुए अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की विकास दर से बढ़ी है।
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पहली तिमाही में 7% विकास दर का अनुमान जताया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यस्था की इस उपलब्धि की सराहना की है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब पूरी दुनिया सुस्ती की चपेट में है, तो भारत की GDP रॉकेट की रफ्तार से क्यों दौड़ रही है? अगर आप भी इसी सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं, तो आइए जानते हैं उन 3 महारथियों के बारे में, जिनके दम पर भारत की GDP ने यह कमाल किया है।
इन 5 महारथियों ने GDP को दी रफ्तार
1. मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर: मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में मजबूत ग्रोथ और निवेश में तेजी ने पहली तिमाही (Q1) में अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। अप्रैल-जून तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 9.2% रही, जो पिछले साल इसी तिमाही में 8.3% थी। वहीं, टर्शियरी यानी सर्विस सेक्टर में 10% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले यह 8% थी। इन दोनों सेक्टर की बेहतर ग्रोथ ने Q1 में GDP की विकास दर को 7.8% तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।
2. मजबूत घरेलू मांग: भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज बनाए रखने में घरेलू मांग और देश के भीतर बढ़ती आर्थिक गतिविधियों की अहम भूमिका रही है। वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद मजबूत घरेलू मांग ने GDP को सहारा दिया और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का काम किया।
ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में मजबूत मांग का असर GST कलेक्शन, ऑटोमोबाइल बिक्री और कोर एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई दिया। हालांकि, ज्यादा लागत और परिचालन संबंधी दिक्कतों के चलते जून में हवाई यात्रियों की संख्या में कमी आई।
3. निवेश: निवेश के प्रमुख संकेतक ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में 11.9% की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह वृद्धि 5.8% रही थी। निवेश में यह तेजी आने वाली तिमाहियों में भी आर्थिक विकास को गति देने में मदद कर सकती है।
4. मौद्रिक स्थिरता: महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति भी अहम रही है। नीतिगत रेपो रेट को स्थिर रखने से अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली है।
5. बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर: कंपनियों की बेहतर वित्तीय स्थिति और बैंकों की मजबूत क्रेडिट ग्रोथ ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। इससे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तक पूंजी पहुंचाने में मदद मिली है, जो आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है।
जीडीपी की रफ्तार तेज होने से क्या फायदा?
जीडीपी (GDP) की रफ्तार तेज होने का सीधा मतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
1. रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे: जब जीडीपी की रफ्तार तेज होती है, तो कंपनियों का उत्पादन, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का काम बढ़ता है। कारोबार विस्तार के कारण युवाओं के लिए प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर में नए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और बेरोजगारी दर में कमी आती है।
2. आय और वेतन में वृद्धि होगी : जीडीपी की रफ्तार बढ़ने से कंपनियों की कमाई और मुनाफा बढ़ता है। इसका सीधा असर कर्मचारियों की सैलरी इंक्रीमेंट, बोनस और नई भर्तियों पर पड़ता है। बाजार में पैसे का फ्लो बढ़ने से आम नागरिक की प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी होती है।
3. इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास होगा: जीडीपी बढ़ने से सरकार को टैक्स के रूप में अधिक राजस्व मिलता है। इस पैसे का उपयोग सरकार देश में एक्सप्रेसवे, रेलवे, एयरपोर्ट्स, अस्पतालों, स्कूलों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में करती है, जिससे देशवासियों का जीवन आसान बनता है।
4. व्यापारियों के लिए मौके बढ़ेंगे: जीडीपी ग्रोथ का मतलब है कि बाजार में मांग मजबूत है। जब लोगों के पास पैसा होता है, तो वे खरीदारी करते हैं। इससे छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई (MSMEs) की बिक्री और मुनाफा बढ़ता है।
5. निवेश में बढ़ोतरी होगी: तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित करती है। विदेशी कंपनियां भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार में अपना पैसा (FDI) लगाती हैं।
6. ग्लोबल साख बढ़ेगी: दुनिया में जिस देश की जीडीपी तेजी से बढ़ती है, उसकी वैश्विक साख मजबूत होती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की साख सुधरने से करेंसी को स्थिरता मिलती है और देश आर्थिक संकटों से निपटने में सक्षम होता है।










































