पिता को खोने के गम में रोते रोते बड़बड़ाया बेटा, सामने आई घासीराम की करतूत
पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश संजय राज ठाकुर की अदालत ने ३१ अगस्त को एक अहम फैसला सुनाते हुए खैरलांजी थाना क्षेत्र के नवेगांव ख निवासी घासीराम बिरनवार को हत्या के मामले में दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास और १००० रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। इस प्रकरण में शासन एवं पीडि़त पक्ष की ओर से जिला लोक अभियोजक संतोष लिल्हारे ने पैरवी की।
यह था पूरा मामला
घटना ८ सितंबर २०२० की रात्रि लगभग ९ से ९.३० बजे के बीच की है। आरोपी घासीराम पिता तीरथलाल बिरनवार अपने पुत्र कुनाल के साथ मोटरसाइकिल से मृतक डूलीचंद राउत के घर पहुँचा। वह डूलीचंद के बेटे सुनील को खेत में मोटर पंप चालू करने के बहाने साथ ले गया। खेत पहुँचकर घासीराम ने अपने बेटे कुनाल को वापस भेजकर सुनील के पिता डूलीचंद को भी मौके पर बुलवाया। इसी दौरान खेत की मेड़ पर पैर फि सलने से सुनील रोपाई में गिर गया। इस पर घासीराम अचानक आक्रोशित हो उठा और सुनील के साथ गाली गलौज करते हुए मारपीट करने लगा। जब डूलीचंद अपने बेटे को बचाने पहुँचे तो घासीराम उनसे भी उलझ गया और मारपीट शुरू कर दी। जान बचाने के लिए डूलीचंद भागे लेकिन घासीराम ने उन्हें दौड़ाकर पकड़ लिया और उनके गले में बंधे गमछे से गला घोंटकर उनकी निर्मम हत्या कर दी।
चश्मदीद बेटे को दी थी जान से मारने की धमकी
इस पूरी वारदात को मृतक के पुत्र सुनील ने अपनी आँखों से देखा। हत्या के बाद आरोपी घासीराम ने सुनील को घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। डर के मारे सुनील रातभर हत्यारे घासीराम के साथ रहा और सुबह चुपचाप घर लौट आया। परिजनों के द्वारा डूलीचंद की तलाश करने पर बेसुध अवस्था में उनका शव खेत के पास मिला। डॉक्टर द्वारा मृत घोषित किए जाने और गले पर निशान दिखने पर परिजनों को हत्या का संदेह हुआ।
अंतिम संस्कार के बाद खुला हत्या का राज
प्रारंभ में खैरलांजी पुलिस ने मृतक के दूसरे पुत्र प्रधुम राउत की रिपोर्ट पर अज्ञात के खिलाफ भादवि की धारा २९४, ३२३ ,३०२,५०६,२ के तहत मामला दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया। अंतिम संस्कार के बाद घाट से लौटने पर पिता को खोने के गम में डूलीचंद का बेटा सुनील स्नान के दौरान रोते हुए बड़बड़ाने लगा कि घासीराम ने हत्या की है। परिजनों के द्वारा सख्ती से पूछताछ करने पर सुनील ने पूरी सच्चाई उगल दी। तत्पश्चात परिजनों के द्वारा सुनील को पुलिस के पास लेकर गए जहां पुलिस के द्वारा पूछताछ करने के बाद अज्ञात अपराध में घासीराम को आरोपी बनाया गया।
गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर हुआ फैसला
सुनील के बयान के बाद पुलिस ने मामले में नामजद अपराध दर्ज कर ११ सितंबर २०२० को आरोपी घासीराम को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। विवेचना पूर्ण कर पुलिस ने न्यायालय में चालान पेश किया। प्रकरण की सुनवाई के दौरान जिला लोक अभियोजक संतोष लिल्हारे ने अभियोजन पक्ष को मजबूत करने के लिए १५ महत्वपूर्ण गवाहों और ४१ दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। न्यायाधीश संजय राज ठाकुर की अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और प्रत्यक्षदर्शी सुनील के बयान के आधार पर घासीराम को धारा ३०२ एवं ५०६ के भाग २ के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई।










































