भारत में लंबे इंतजार के बाद जनगणना की प्रक्रिया गुरुवार से शुरू हो गई है। इस बार देश की करीब 1.4 अरब आबादी (India Population) का डेटा जुटाया जाएगा। यह जनगणना (Census) पहले 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसमें देरी हुई। अब यह पूरा अभियान अगले साल मार्च तक चलेगा।
घर-घर जाकर जुटाया जाएगा डेटा
इस विशाल अभियान में करीब 30 लाख कर्मचारी शामिल होंगे, जिनमें ज्यादातर स्कूल शिक्षक हैं। ये कर्मचारी देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हर घर तक पहुंचेंगे। करीब 6.4 लाख गांवों में जाकर हर व्यक्ति की गिनती की जाएगी, ताकि कोई भी छूट न जाए।
दो फेज में होगा सर्वे
जनगणना (Census 2027) को दो फेज में पूरा किया जाएगा। पहले फेज में घरों और उनकी स्थिति का डेटा जुटाया जाएगा। दूसरे फेज में परिवार के सदस्यों की सामाजिक और आर्थिक जानकारी ली जाएगी। पूरे अभियान पर करीब 1.3 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है।
पहली बार सेल्फ एन्यूमरेशन का ऑप्शन
इस बार जनगणना में लोगों को खुद अपना डेटा भरने का ऑप्शन भी दिया गया है। सरकार ने 16 भाषाओं में एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है, जहां लोग अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। बाद में अधिकारी घर जाकर इस डेटा को वेरिफाई करेंगे।
डिजिटल टूल्स से आसान होगा काम
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल टूल्स के सहारे की जा रही है। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के जरिए डेटा कलेक्शन और मॉनिटरिंग की जाएगी। एक खास ऐप से घरों को छोटे-छोटे एरिया में बांटकर मैप किया जा रहा है, ताकि कोई भी व्यक्ति छूट न जाए। डिजिटल सिस्टम की वजह से इस बार डेटा जल्दी प्रोसेस होगा और कई अहम जानकारी जल्द जारी की जा सकेगी।
कास्ट डेटा पर भी रहेगा फोकस
जनगणना के दूसरे फेज में कास्ट से जुड़ा डेटा भी जुटाया जाएगा। 2011 में 80 साल बाद पहली बार कास्ट डेटा लिया गया था, लेकिन उसे पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया गया था।
भारत में कास्ट सिस्टम का असर आज भी समाज और राजनीति में देखा जाता है। कई सरकारी योजनाओं और आरक्षण में इस डेटा की अहम भूमिका होती है।










































