पोर्टल के ताले में कैद मजदूरों का भुगतान, झालीवाड़ा पंचायत में १० लाख का भुगतान अटका

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पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत झालीवाड़ा में इन दिनों विकास कार्यों पर पोर्टल की तकनीकी खामी का ग्रहण लग गया है। १५वें वित्त आयोग के तहत कराए जा रहे निर्माण कार्यों का भुगतान पिछले काफ ी समय से अधर में लटका हुआ है। स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि एक ओर जहां मजदूरों के चूल्हे बुझने की कगार पर हैं, वहीं दूसरी ओर निर्माण सामग्री प्रदाताओं ने पंचायत के चक्कर काटना शुरू कर दिया है। पोर्टल बंद होने की यह समस्या केवल झालीवाड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास की कई पंचायतों में भी भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है।

मजदूरों में आक्रोश उधारी के भरोसे चल रहा घर

ग्राम पंचायत झालीवाड़ा में १५वें वित्त की राशि से लगभग चार महत्वपूर्ण कार्य पूर्णता की ओर हैं। इन कार्यों में दिन रात पसीना बहाने वाले मजदूरों को अब तक उनकी मजदूरी नसीब नहीं हुई है। वर्तमान में स्थिति यह है कि मजदूरों को अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए साहूकारों और परिचितों से उधारी लेनी पड़ रही है। मजदूरी ना मिलने से ग्रामीणों और मजदूरों के बीच भारी आक्रोश व्याप्त है। मजदूरों का कहना है कि काम पूरा होने के बावजूद पैसों के लिए उन्हें दर.दर भटकना पड़ रहा है।

सामग्री विक्रेताओं का बढ़ रहा दबाव

पंचायत के द्वारा निर्माण कार्य में उपयोग की गई सामग्री जैसे सीमेंट, लोहा, गिट्टी और ईंटों का भुगतान भी पोर्टल बंद होने के कारण नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि सामग्री का करीब १० लाख रुपये का भुगतान अटका हुआ है। इसके चलते दुकान संचालक और सप्लायर आए दिन पंचायत भवन और जनप्रतिनिधियों के पास तगादा कर रहे हैं। जिससे पंचायत के सामने एक असहज स्थिति निर्मित हो गई है।

प्रस्तावित कार्य बाधित समय सीमा पर संकट

भुगतान नही होने का सीधा असर आगामी विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है। पंचायत सूत्रों के अनुसार जो कार्य वर्तमान में चल रहे हैं उन्हें तो किसी तरह खींचतान कर पूरा किया जा रहा है। लेकिन पोर्टल की समस्या के कारण कई नए प्रस्तावित कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं। यदि पोर्टल जल्द शुरू नहीं हुआ तो तय समय सीमा में विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना ग्राम पंचायत के लिए असंभव हो जाएगा।

अधिकारियों की उदासीनता से बड़ी परेशानी

ग्राम पंचायत के द्वारा इस गंभीर समस्या को लेकर जनपद पंचायत, जिला पंचायत और वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें भेजी जा चुकी हैं। पंचायत प्रशासन का कहना है कि उनकी ओर से पूरी तत्परता दिखाई जा रही है लेकिन पोर्टल का बंद होना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं। जिसका खामियाजा सीधे तौर पर गरीब मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है।

व्यापक स्तर पर है समस्या

वारासिवनी जनपद की अधिकांश पंचायतों में पोर्टल बंद होने की वजह से वित्तीय लेनदेन पूरी तरह ठप है। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से मांग की है कि प्रशासन इस तकनीकी बाधा को तत्काल दूर करें ताकि अटके हुए भुगतानों का निराकरण हो सके और विकास की गति फिर से पटरी पर लौट सके।

भुगतान नही होने से उधार मांग कर परिवार का संचालन हो रहा है- रूपा सोनेकर

मजदूर रूपा सोनेकर ने बताया कि एक माह से भुगतान नहीं हुआ है खाने.पीने की वस्तु दवा पानी खरीद कर हमें अपना जीवन व्यापन करना पड़ता है। जिसमें भारी समस्या अब उत्पन्न हो गई है एक महीने से हम बहुत ज्यादा परेशान है। रुपए हमें नहीं मिले हैं उधार मांग कर परिवार का संचालन हो रहा है। सरपंच से इसकी शिकायत भी करें है परंतु राशि नहीं आई बताते हैं इसमें ऊपर की समस्या बताई जा रही है।

भुगतान नही होने से लालन पालन करने में परेशानी हो रही है-सुरेंद्र टेंभरे

मजदूर सुरेंद्र टेंभरे ने बताया कि हमारे द्वारा कार्य किया जा रहा है कुछ कार्य पूरे भी हो गए हैं। परंतु भुगतान नहीं आया है इस कारण से हमें तकलीफ है परिवार का तो जैसे तैसे हम पालन पोषण कर रहे हैं। पंचायत पर हम मजदूरों सहित सामान का करीब १० लाख रुपए का बकाया है क्या करें समझ नहीं आ रहा है। काम तो करना पड़ेगा अभी हमारा काम चालू है इसकी कहीं शिकायत तो नहीं करें है परंतु भुगतान के लिए बोला गया है। तो हो जाएगा कहते हैं एक महीने से हम लगातार बोल रहे हैं हमें भी मशीनों और मजदूरों का भुगतान देना है।

भुगतान नही होने से सभी मजदूरों में आक्रोश व्याप्त है-सरोवर देशमुख

सरपंच प्रतिनिधि सरोवर देशमुख ने बताया कि बहुत समस्या है ४ काम पंचायत में पूर्ण हो चुके हैं। उसका करीब १० लाख का भुगतान बकाया है लगातार मजदूर भी हमें शिकायत कर रहे हैं। यह बेचारे मजदूर रोज खरीद कर खाते हैं इन्हें भुगतान की अति आवश्यकता है। इसके लिए मेरे द्वारा जनपद में भी बात रखी गई थी परंतु पोर्टल बंद बताते हैं अब पोर्टल क्यों बंद है पता नहीं। इस संबंध में आसपास की पंचायत में भी पूछताछ की गई तो वहां भी यही समस्या है। यह १५वें वित्त का काम है रुपए नहीं निकल रहे हैं एक माह से स्थिति खराब है। मजदूर उधारी के भरोसे चल रहे हैं लोहा सीमेंट गिट्टी वाले भी परेशान कर रहे हैं। इसके लिए हमारे द्वारा जनपद और जिला पंचायत सहित समस्त अधिकारियों को शिकायत की गई है। परंतु शिकायत पर कोई अमल नहीं हो रहा है जल्द यदि भुगतान हो जाता है तो मजदूरों को राहत मिलेगी। पंचायत में काम प्रारंभ करेंगे इसके लिए हम लगातार प्रयासरत है।

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