इस्लामाबाद/बीजिंग: अमेरिकी एफ-16 लड़ाकू विमानों की महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी पाकिस्तान के रास्ते चीन तक पहुंच चुकी है। दरअसल अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति के तहत पाकिस्तान को F-16 लड़ाकू विमान और Link-16 तकनीकी सहायता का मिलना भारत के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। चीन को इसका जबरदस्त तकनीकी फायदा मिल रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान की वायुसेना एक ‘लड़ाकू विमानों का क्लासरूम’ बन गई है जहां चीन अमेरिकी तकनीक की निगरानी कर भारत के खिलाफ रणनीति तैयार कर रहा है। यह मामला चीन-पाकिस्तान के गहरे सैन्य गठजोड़ और उससे भारत की सुरक्षा को उत्पन्न खतरों से जुड़ा है।
वॉशिंगटन भारत से कहता है कि वह चीन के खिलाफ इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र में मजबूती से खड़ा रहे लेकिन वो पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील अमेरिकी कॉम्बैट इकोसिस्टम को भी बनाए हुआ है। यह संतुलन नहीं है। यह एक जोखिम भरा काम है जिससे भारत की कमजोरियां जाहिर हो सकती हैं। पाकिस्तान में मौजूद एक हैंगर, एक रडार, एक सिम्युलेटर, एक मिशन फाइल, एक मेंटेनेंस लाइन और एक डेटा लिंक के जरिए चीन भारत के खिलाफ युद्ध संबंधित तैयारियां करता है।










































