Saint Girvar Das Maharaj Joins CRPF: सीआरपीएफ से बर्खास्त मुरैना के गिरवर सिंह तोमर ने 26 साल बाद अपनी लड़ाई जीत गए हैं। इस दौरान वह संत बन गए थे। हाईकोर्ट के फैसले के बाद फिर से सीआरपीएफ में उनकी वापसी हो गई है। बीजापुर जाकर उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। वर्दी में उनकी तस्वीर सामने आई है।मुरैना: एक संत ने 26 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार अपनी खोई हुई वर्दी वापस ले ली। यह कहानी मुरैना के संत गिरवर दास महाराज की है जो कभी सीआरपीएफ में हवलदार के पद पर पदस्थ थे। लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी से हुए विवाद के बाद उनको बर्खास्त कर दिया गया। तब से गिरवर सिंह तोमर कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।1991 में मिली थी उन्हें पहली नौकरी
साल 1991 में मुरैना के छिछावली गांव के रहने वाले गिरवर सिंह तोमर को सीआरपीएफ में हवलदार की नौकरी मिली थी। 8 साल तक उन्होंने ईमानदारी से अपनी नौकरी की लेकिन इसके बाद एक वरिष्ठ अधिकारी से उनका विवाद हो गया। जिसके बाद उन पर विभागीय जांच बिठा दी गई और जांच के बाद उन्हें 1999 में बर्खास्त कर दिया गया।
नौकरी जाने के बाद मुरैना आ गए वापस
नौकरी चले जाने के बाद गिरवर सिंह तोमर मुरैना वापस आ गए। लेकिन उनका घर पर मन नहीं लगा तो उन्होंने बारह द्वारी मंदिर में संत बनकर पूजा करना शुरू कर दिया। कुछ दिनों बाद वे गुफा मंदिर में पहुंच गए। यहां उन्हें गिरवर दास महाराज का नाम दिया गया। संत बनने के बावजूद गिरवर सिंह तोमर ने हार नहीं मानी और उन्होंने अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखी।










































