बांग्लादेश बार्डर तक आने-जाने में 12 दिन लगे फिर भी ठग हाथ नहीं आया

0

क्षेत्र में तरह-तरह की डिजिटल ठगी बढ़ती जा रही है। झूठे प्रलोभनों से अप्रभावित रहते हुए बचने की आवश्यकता है। वजह यह है कि डिजिटल ठगी के कई पेंच हैं। कानून के हाथ भी इसके माध्यम से ठगी करने वालों की कॉलर तक आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं। ऑनलाइन व्यापार करने के नाम पर गुमराह करते हुए झाबुआ के एक व्यापारी से पिछले माह ही एक लाख 98 हजार रुपये ठग लिए गए।

पुलिस ने इस डिजिटल ठग को पकड़ने के लिए हजारों किलोमीटर का सफर किया। आने-जाने में 12 दिन लग गए। जिस मोबाइल सिम के माध्यम से ठगी हुई थी, उसके बांग्लादेश बार्डर पर स्थित घर तक झाबुआ पुलिस पहुंच गई लेकिन ठग हाथ नहीं आया। लंबी कवायद के बाद मिले सिमधारक ने कह दिया कि उसकी सिम तो पिछले वर्ष जुलाई में ही गुम हो गई थी और उसने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी।

झाबुआ के व्यापारी महेश झा से जब एक लाख 98 हजार की मोबाइल के माध्यम से बड़ी ठगी हो गई तो उन्होने पुलिस को शिकायत की। यह सिम बंगाल के दूरस्थ क्षेत्र दक्षिण दिनासपुर की पाई गई। पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता ने धोखाधड़ी के इस मामले में झाबुआ पुलिस को मोबाइल सिमधारक तक पहुंचने के पिछले माह 19 जनवरी को निर्देश दिए। झाबुआ थाने के उपनिरीक्षक रजनसिंह गणावा और एक आरक्षक धर्मेन्द्र अर्जन 22 जनवरी को ठग को पकड़ने के लिए झाबुआ से रवाना हो गए।

12 दिन की जद्दोजहद

इंदौर होते हुए रेल से पश्चिम बंगाल के हावड़ा शहर पहुंचने में झाबुआ पुलिस को तीन दिन लग गए। वहां से मालदा टाउन और फिर वहां से पुलिस थाना हरिरामपुर जिला दक्षिण दिनासपुर पुलिस पहुंची। वहां थाना प्रभारी से चर्चा की तो उन्होने बालूरघाट जिले के पुलिस अधीक्षक कार्यालय से अनुमति प्राप्त करने का कहा। अनुमति वापस लेकर आने के बाद जब थाना हरिरामपुर वापस जांच अधिकारी आए तो वहां के थाना प्रभारी ने मदद करना शुरू की। अब सिमधारक नीजमुल इस्लाम पिता शेख सैयद अली निवासी छोटो मोलहार की तलाश शुरू हुई।

मोटरसाइकिलों से पहुंचे

बिलकुल बांग्लादेश बार्डर पर स्थित सिमधारक के गांव छोटो मोलहार झाबुआ पुलिस पहुंची तो वह घर पर नहीं मिला। फिर उस गांव की पंचायत बगीचापुर पहुंचकर सरपंच से मोबाइलधारक का प्रमाण-पत्र लिया गया। वहां से निकलकर गंगारामपुर आ गए तो सूचना मिली कि मोबाइलधारक अपने गांव आ चुका है। वापस ग्राम छोटो मोलहार पहुंचे तो नीजमुल ने बताया कि उसकी मोबाइल सिम पिछले साल पांच जुलाई को ही गुम चुकी है। इसकी सूचना उसने थाने में भी दी है। ठगी के बारे में उसे कुछ नहीं पता। आखिरकार वापस लंबी यात्रा करते हुए दो फरवरी को झाबुआ पुलिस खाली हाथ लौट आई।

एक नजर में

– 12 दिन आने-जाने में लगे

– 01 लाख 98 हजार की ठगी

– 02 सदस्यीय पुलिस दल गया

– 22 किमी छोटो मोलहार बांग्लादेश से

– 05 जुलाई 2020 को ही सिम गुम गई

इस तरह से होती है ठगी

– मोबाइल पर प्रलोभन देकर पैसे जमा करवाए जाते हैं

– बैंक खाते में पैसे जमा होते ही मोबाइल सिम बंद कर ली जाती है

– पता दूरस्थ क्षेत्रों का रहता है

-खुद सावधान रहें तो बात बनेगी

किसी से भी प्रभावित नहीं होना है

झाबुआ थाना प्रभारी सुरेन्द्र सिंह का कहना है कि मोबाइल पर अलग-अलग तरीके से ठगी की जाती है। आमजनों को सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी व्यक्ति से प्रभावित नहीं हो और न ही उसके प्रलोभन में आएं। सोच समझकर ही नगद राशि का किसी अंजान के कहने पर हस्तांतरण करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here