बालाघाट : आत्मनिर्भर कैसे बने स्ट्रीट वेंडरों

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प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने बीते दिनों ही बालाघाट जिले से प्रदेश के हजारों स्ट्रीट वेंडरों को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत खाते में पैसे जमा करवाए थे लेकिन हकीकत में योजना का लाभ मैदानी स्तर पर कितना मिल रहा है इस बात के शहर के भीतर ही दर्जनों उदाहरण मिल रहे है।

देश के प्रधानमंत्री द्वारा लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना योजना लाई गई ताकि ऐसे स्ट्रीट वेंडर्स जिनके व्यवसाय लॉकडाउन के कारण बुरी तरह प्रभावित हो गए है उन सभी स्ट्रीट वेंडर्स को आत्मनिर्भर बनाने की मंशा से बैंकों के माध्यम से 10 हजार रुपए का ऋण प्रदान किया जा रहा है ताकि वे दोबारा अपने व्यवसाय को प्रारंभ कर सकें, लेकिन सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली के कारण सभी हितग्राहियों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है बड़ी संख्या में ऐसे हितग्राही देखे जा रहे हैं जो बैंकों का चक्कर लगाते लगाते परेशान हो गए हैं और अब इस योजना का लाभ पाने की उम्मीद भी छोड़ दिए हैं।

आपको बताये की बड़ी संख्या में हितग्राहियो द्वारा नगरपालिका में स्वनिधि योजना का लाभ पाने के लिए पंजीयन कराया गया है और लगातार पंजीयन कराने का क्रम जारी है वही इस योजना का लाभ पाने वालों की संख्या बहुत कम है। जबकि नगर पालिका द्वारा हितग्राहियो का पंजीयन कराने के पश्चात उनके आवेदन को संबंधित बैंकों में भेजा जा चुका है बैंक द्वारा कोई ना कोई कारण बताकर आवेदन को नामंजूर किया जा रहा है वहीं कई मामलों में अनावश्यक लेटलतीफी किया जा रहा है जिससे हितग्राही परेशान हो गए हैं और लगातार बैंकों व नगरपालिका से चक्कर काटे जा रहे हैं।

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के सिटी मिशन मैनेजर दीपक कुमार बिठले ने बताया कि यह सही बात है इस योजना में भी बैंकों की बहुत शिकायतें आ रही है बैंकों द्वारा हितग्राहियों को परेशान किया जा रहा है कई हितग्राही को कहां जा रहा है मैनेजर साहब नहीं है साहब आएंगे तब कार्यवाही करेंगे।

यह कि वार्ड नंबर 11 की निवर्तमान पार्षद और नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष बताते हैं कि सरकार स्ट्रीट वेंडरों को स्वनिधि योजना का लाभ देने के लिए कार्य कर रही है इसके परिपालन में नगरपालिका भी नगर के जितने भी स्ट्रीट वेंडर है उनका नगर पालिका में पंजीयन कर उनके आवेदन को बैंक भिजवा रही है लेकिन बैंक से हितग्राही निराश होकर वापस लौट रहे हैं।

मोबाइल पर चर्चा करने पर अग्रणी बैंक प्रबंधक रतन गोराई ने बताया कि 20 हजार रुपए का ऋण लेने को लेकर अगर 500 रुपए स्टांप ड्यूटी लिया जा रहा है तो वह स्टेट गवर्नमेंट की ही पॉलिसी है वही बैंक के कार्यों में कुछ टाइम तो लगता है। इसके अलावा अगर हितग्राही को कोई न कोई कारण बताकर परेशान किए जाने जैसी कोई बात है तो इसको लेकर संबंधित बैंकों से बात की जाएगी।

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