ढाका: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान अपने पहले विदेशी दौरे पर चीन जा सकते हैं। बांग्लादेश में नई BNP सरकार बनने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा होगी। खास बात है कि रहमान पहले दौरे के लिए चीन को ऐसे समय में चुन रहे हैं, जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पहले से न्योता दिया हुआ है। इस संभावित यात्रा पर भारत की पैनी नजर है। तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना पर समझौता इस दौरे की सबसे खास बात हो सकती है।
हाल के दिनों में जल-बंटवारे से जुड़े मुद्दे भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव का कारण बनकर उभरे हैं। बांग्लादेश तीस्ता नदी प्रोजेक्ट के लिए चीन से फंडिंग हासिल करना चाहता है। ढाका ने कहा है कि भारत के साथ उसके संबंध काफी हद तक गंगा-जल बंटवारा समझौते को रिन्यू करने या पूरा होने पर निर्भर करेंगे।भारत और बांग्लादेश, दोनों चाहते हैं अच्छे रिश्ते
भारत यह समझता है कि बांग्लादेश के लिए साथ अच्छे रिश्ते रखना जरूरी है। नई दिल्ली ने इस बारे में पहल भी की है और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश त्रिवेदी को ढाका में अपना नया दूत चुनकर साफ कर दिया है कि रिश्तों को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाएगा।
वहीं, बांग्लादेश की नई सरकार से भी ऐसा ही संकेत मिलता है कि तारिक रहमान भारत के साथ रिश्ते सुधारना चाहते हैं। बांग्लादेश तीन तरफ से भारत से घिरा हुआ है। ऐसे में उसकी आर्थिक स्थिति में कोई भी सुधार भारत के सहयोग पर निर्भर करता है। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में भारत विरोधी तत्वों में तेजी आई है। इन तत्वों का दावा है कि वे अमेरिकी और चीनी निवेश का फायदा उठा सकते हैं।भारत की सुरक्षा के लिए जरूरी बांग्लादेश
ऐसे में भारत के हित में होगा कि वह सावधानी से रिश्तों को मजबूत करे और बांग्लादेश के अंदर भारत-विरोधी गुट बनाने से रोके। बांग्लादेश में रहमान के सामने मुख्य विराध जमाक-ए-इस्लामी की तरफ है। यह एक कट्टरपंथी इस्लामिक राजनीतिक पार्टी है. जिसने 1971 के मुक्ति आंदोलन से पहले हिंदुओं के नरसंहार में अहम भूमिका निभाई थी।
भारत अपनी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं कर सकता, जिसमें सीमा पर बाड़ लगाना और सिलीगुड़ी के चिकन नेक कॉरिडोर को मजबूत करना शामिल है। यह कॉरिडोर ही पूर्वोत्तर भारत तक पहुंचने का मुख्य जमीनी रास्ता है।










































