भारत की तीसरी आंख! सरकार की हरी झंडी और लॉन्च हो जाएंगे NVS-03 और Gisat-1A सैटेलाइट, जानें सबकुछ

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नई दिल्ली: स्पेस में भारत लगातार अपनी ताकत बढ़ाने में जुटा है। इसी कड़ी में दो रणनीतिक रूप से अहम सैटेलाइट, NVS-03 और Gisat-1A लॉन्चिंग के लिए तैयार हैं। ये सैटेलाइट कई हफ्तों से श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट पर लॉन्च के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे। इन दोनों सैटेलाइट की खास बात ये है कि इनका इस्तेमाल विशेष रूप से मिलिट्री कार्यों के लिए होगा। इन सैटेलाइट के साथ ही एक GSLV-Mk2 रॉकेट भी लॉन्च को तैयार है। हालांकि, अभी लॉन्चिंग की मंजूरी न मिलने के कारण प्रोपेलेंट भरने का काम बीच में ही रोक दिया गया था।

स्पेसपोर्ट पर लॉन्चिंग को तैयार दो सैटेलाइट

सूत्रों ने हमारे सहयोगी अखबार TOI को यह जानकारी दी है। यह देरी ऐसे समय में हो रही है जब सरकार ने अभी तक दो PSLV मिशन को लेकर जानकारी नहीं दी है। इनमें एक 18 मई, 2025 और दूसरा 12 जनवरी, 2026 को सामने आया था। हालांकि, इनकी विफलता के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, जिसकी वजह से भारत का लॉन्च प्रोग्राम धीमा हो गया है।

क्यों अहम हैं NVS-03 और Gisat-1A

सूत्रों ने बताया कि लॉन्चिंग के लिए तैयार NVS-03 सैटेलाइट बेहद खास है। ये भारत के दूसरी पीढ़ी के NavIC नेविगेशन कॉन्स्टेलेशन का अगला सैटेलाइट है। वहीं GISAT-1A एक एडवांस्ड जियो-इमेजिंग सैटेलाइट है, जो भारतीय जमीन पर लगभग रियल-टाइम नजर रखने में सक्षम है। दोनों ने लॉन्च से पहले की ज्यादातर तैयारियां पूरी कर ली हैं और उड़ान के लिए तैयार हैं।

कहां अटक रहा मामला

  • लॉन्च में यह रुकावट ISRO के लिए एक मुश्किल साल के बाद आई है।
  • 12 जनवरी को, PSLV-C62 तीसरे चरण (PS3) में गड़बड़ी के कारण अपने पेलोड को ऑर्बिट में स्थापित करने में विफल रहा।
  • उससे आठ महीने पहले, PSLV-C61 भी विफल हो गया था, जिसका कारण ISRO ने केवल PS3 में प्रेशर ड्रॉप बताया था।
  • केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने हाल ही में बेंगलुरू में कहा था कि PSLV-C62 मिशन की जांच करने वाली विफलता विश्लेषण समिति ने गड़बड़ी का कारण पता लगा लिया है, लेकिन निष्कर्षों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
  • PSLV से आगे भी दिख रही यह सावधानी विभाग के अंदर के लोगों को भी उलझन में डाल रही है, जो पहले से ही कम मनोबल से जूझ रहा है।
  • विभाग के एक सूत्र ने कहा कि GSLV और LVM रॉकेट PSLV के तीसरे चरण से कोई तकनीक नहीं लेते हैं। यह देरी इसलिए अहम है क्योंकि दोनों सैटेलाइट की रणनीतिक भूमिकाएं हैं।

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