इस्लामाबाद: भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद से सिंधु जल संधि को निलंबित किया हुआ है। इस संधि के अंतर्गत आने वाली चिनाब नदी के पानी का रास्ता मोड़ने के लिए एक बड़ी परियोजना पर काम किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत चिनाब नदी का पानी ब्यास नदी में छोड़ा जाना है। पाकिस्तान ने भारत की इस परियोजना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय (FO) ने इसे सिंधु जल संधि और दूसरे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया है।
चिनाब नदी को लेकर परेशान क्यों है पाकिस्तान
चिनाब नदी हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति में चंद्र और भागा नदियों के संगम से बनती है। 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुए सिंधु जल संधि के तहत, तीन पश्चिमी नदियां- सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान को और तीन पूर्वी नदियां- रावी, ब्यास और सतलुज भारत को आवंटित की गई हैं। लेकिन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमलों को देखते हुए भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया और चेतावनी दी है कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते हैं।दरअसल, भारत 1 अगस्त से हिमाचल प्रदेश में चिनाब नदी पर स्थित प्रस्तावित “लिंक-3 परियोजना” पर काम शुरू करेगा। इस परियोजना का उद्देश्य चिनाब नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास बेसिन में मोड़ना है और इसकी अनुमानित लागत 26.2 अरब भारतीय रुपये है। इसी पर पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। उसे डर है कि अगर यह परियोजना पूरी हो जाती है तो भारत चिनाब नदी का पानी ज्यादा इस्तेमाल करेगा।इस्लामाबाद: भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद से सिंधु जल संधि को निलंबित किया हुआ है। इस संधि के अंतर्गत आने वाली चिनाब नदी के पानी का रास्ता मोड़ने के लिए एक बड़ी परियोजना पर काम किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत चिनाब नदी का पानी ब्यास नदी में छोड़ा जाना है। पाकिस्तान ने भारत की इस परियोजना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय (FO) ने इसे सिंधु जल संधि और दूसरे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया है।पाकिस्तान ने ‘लिंक-3 परियोजना’ पर क्या कहा
एक सवाल के जवाब में, पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता डॉ ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कहा, “हां, हमने यह रिपोर्ट देखी है, साथ ही भारत सरकार द्वारा जारी सार्वजनिक निविदा दस्तावेज भी देखा है, जिसमें भारत ने चिनाब-ब्यास लिंक सुरंग परियोजना के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। इसका उद्देश्य चिनाब से हर साल 1.9 मिलियन एकड़-फीट पानी ब्यास प्रणाली में स्थानांतरित करना है।”
भारत पर कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया
उन्होंने आगे कहा, “चिनाब नदी के पानी को ब्यास प्रणाली में इस तरह एक बेसिन से दूसरे बेसिन में मोड़ना न केवल सिंधु जल संधि का, बल्कि संधि कानूनों — विशेष रूप से संधियों के कानून पर वियना कन्वेंशन — और अंतरराष्ट्रीय जल कानून के व्यापक ढांचे का भी गंभीर उल्लंघन है। इसमें 1977 के जलमार्गों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन में परिलक्षित सिद्धांत भी शामिल हैं।”










































