भोपाल की बेटी ने देश-विदेश के 150 विलुप्तप्राय प्रजाति के पौधों से घर में बना दिया मिनी जंगल, CM शिवराज ने की तारीफ

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राजधानी भोपाल में रहने वाली एक पर्यावरण-प्रेमी युवती ने अपने घर को मिनी जंगल बनाया है। उन्‍होंने अपने आवास परिसर के साढ़े आठ सौ स्केवयर फिट में चार हजार से ज्यादा प्रजाति के पेड़-पौधों को लगाया है। ये युवती हैं प्रोफेसर साक्षी भारद्वाज, जिनकी इसी खूबी के चलते उनका नाम ओमएजी बुक ऑफ रिकार्ड ने राष्ट्रीय रिकार्ड के रूप में दर्ज किया है। मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह को जब इस पहल के बारे में पता चला तो उन्‍होंने भी ट्वीट करते हुए प्रोफेसर साक्षी भारद्वाज की तारीफ की और उनके इस प्रयास को अभिनंदनीय बताया। साथ ही उन्‍होंने समस्‍त प्रदेशवासियों से हरियाली बढ़ाने हेतु योगदान देने की अपील की। साक्षी भारद्वाज के घर जाएंगे तो देखकर चौंक जाएंगे कि यह घर या जंगल है। जब घर ही जंगल जैसे लग रहा है तो फिर इसका नाम भी साक्षी ने कुछ ऐसा ही रखा है जैसा आप सोच रहे होंगे। जी हां, उन्‍होंने अपने गार्डन को नाम दिया है- जंगलवास। इस जंगलवास में लगभग चार हजार पेड़-पौधे घर के बाहर और कुछ तो घर के अंदर भी लगे हुए हैं। साक्षी इनकी देखभाल बहुत अच्छी तरह से करती हैं। वे कहती हैं कि पेड़-पौधों में भी जान होती है और ये स्पर्श को भलीभांति समझते है। साक्षी कहती हैं कि इनकी साफ-सफाई, कांट-छांट में प्रेम और स्नेह के भाव का होना बहुत जरूरी है। यदि कोई इन बातों का ध्यान नहीं रखता है, तो पेड़-पौधे उस तरह से नहीं बढ़ पाते, जैसे बढ़ना चाहिए या फिर वे सूख जाते हैं।

आठ हजार रुपये का एक पौधा, विदेशों से भी मंगवाए

साक्षी ने बताया कि उनके पास इन पेड़-पौधों में से 150 प्रजाति के वे पेड़-पौधे हैं जो या तो विलुप्त हो चुके हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। विश्व के सबसे बड़े जंगल अमेजन से लेकर फ्लोरिडा, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपिंस आदि कई देशों से मंगाए इन पौधों को साक्षी ने अपने घर में बच्चों की तरह सहेजकर रखा है। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि इनमें से एक विशेष पौधा आठ हजार रुपये का है। साक्षी ने बताया कि वैरीगेटेड मोस्टेरा डेलीगोसिया अमेजन रेड फारेस्ट में पाया जाता है। इसकी खासियत ये है कि इसमें सबसे ज्यादा आक्सीजन होती है। ये एक बेल टाइप क्रीपर है, जो आक्सीजन के लिहाज से बहुत लाभदायी है। यदि हम भारत की बात करें तो देशभर के विभिन्न् प्रजाति के पेड़-पौधे साक्षी के पास हैं। हिमाचल प्रदेश के जंगलों से लेकर एरनाकुलम, नागालैंड और अन्य प्रदेशों और शहरों से पौधों को मंगवाया है।

मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी के एग्रीकल्चर विभाग में सहायक व्‍याख्‍याता साक्षी भारद्वाज ने कहा कि मेट्रो शहरों में प्लांट कम्युनिटी होती है। यहां भी प्लांट कम्युनिटी बने। वह अब ऐसे पौधे लगाने की तैयारियां कर रही हैं, जिससे आकर्षित होकर तितलियां आ सकें। साथ ही उन्‍होंने नारियल के खोल में पौधों को सजाया है।

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