डिंडौरी: दोपहर का वक्त था। कलेक्ट्रेट के दफ्तरों में आम दिनों की तरह ही सुस्ती छाई हुई थी। फरियादी अपनी फाइलें लेकर बाबुओं के चक्कर काट रहे थे। इसी बीच बिना किसी तामझाम और तामील के कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया अचानक गलियारे से होते हुए विभागों के कमरों में दाखिल होने लगीं। कलेक्टर को अचानक सामने खड़ा देख अधिकारियों के पसीने छूट गए। जो बाबू आराम से चाय-पानी में व्यस्त थे, वो अपनी सीटों की तरफ दौड़ने लगे। पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और कलेक्ट्रेट की सुस्ती पल भर में गायब हो गई।
- अचानक कलेक्ट्रेट के अलग-अलग विभागों में जांच करने पहुंच गईं कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया।
- दफ्तरों में सन्नाटा पसरा था और कई कर्मचारी अपनी कुर्सियों से गायब मिले।
- हाजिरी रजिस्टर और मौके पर मौजूद स्टाफ का मिलान किया तो खुली पोल।
- बिना किसी सूचना या छुट्टी के गायब मिले कुल 25 कर्मचारियों पर गिरी गाज।
- लापरवाह स्टाफ का एक दिन का वेतन काटने और कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश।
रजिस्टर खुला था पर कुर्सियां थीं खाली
कलेक्टर जब एक-एक कर दफ्तरों के अंदर पहुंचीं, तो नजारा हैरान करने वाला था। टेबल पर फाइलें खुली थीं, हाजिरी रजिस्टर पर दस्तखत की जगह खाली थी, लेकिन साहब लोग अपनी सीटों से नदारद थे। मैडम ने तुरंत अटेंडेंस रजिस्टर अपने हाथ में लिया और मौके पर मौजूद कर्मचारियों की गिनती शुरू कर दी। मिलान करने पर पता चला कि एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 25 कर्मचारी बिना किसी सूचना या मंजूर छुट्टी के दफ्तर से बंक मार चुके थे। इस खुली लापरवाही को देख कलेक्टर का पारा चढ़ गया।










































