भोपाल। यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक केंद्र ‘रवींद्र भवन’ है। वही, रवींद्र भवन, जहां मुख्यमंत्री, राज्यपाल और स्टेट गेस्ट से लेकर देश-विदेश के दिग्गज कलाकार शिरकत करते हैं, लेकिन इस वीवीआईपी परिसर के अंदर जाते ही आपको जिस चीज का सबसे पहले अहसास होगा, वह कला या संस्कृति नहीं, बल्कि दमघोंटू गर्मी और जिम्मेदारों की घोर लापरवाही है।राष्ट्रीय स्तर के इस केंद्र के तीनों प्रमुख सभागारों का सेंट्रल एसी सिस्टम पिछले तीन-चार महीनों से सफेद हाथी बनकर खड़ा है, लेकिन सिस्टम की बेशर्मी देखिए, आरटीआइ से हुए खुलासे चीख-चीख कर बता रहे हैं कि वर्ष 2023 से सितंबर 2025 के बीच इसी एसी की मरम्मत और मेंटेनेंस के नाम पर सरकारी खजाने से 32 लाख रुपये फूंके जा चुके हैं।हद तो यह है कि सिर्फ 2025 में ही 9 लाख रुपये का बिल काटा गया है। सवाल यह है कि जब एसी महीनों से बंद पड़े हैं, तो यह लाखों रुपये आखिर किसकी जेब ठंडी कर रहे हैं?
1500 की क्षमता और ‘किराए’ के चंद एसी का मजाक
रवींद्र भवन में 1500 सीट वाला हंसध्वनि, 500 सीट वाला अंजनी और 212 सीट वाला गौरांजनी सभागार मौजूद है। यहां रोज कोई न कोई बड़ा आयोजन होता है। सेंट्रल एसी बंद होने पर जिम्मेदारों ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए ‘किराए के एसी’ का जुगाड़ बिठा दिया। जगह-जगह किराए के एसी टांग दिए गए हैं और उनकी वायरिंग खुलेआम मौत को दावत दे रही है।
सुरक्षा के मानकों की धज्जियां उड़ रही हैं और भारी-भरकम सभागार में चंद किराए के एसी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहे हैं। दर्शक और कलाकार पसीने से तरबतर होकर कार्यक्रम का हिस्सा बनने को विवश हैं।
अधिकारी ‘रिकार्ड’ देखने का बहाना भले ही बना लें, लेकिन रवींद्र भवन की खुली वायरिंग और बंद एसी इस बात का ‘रिकार्ड’ हैं कि सरकारी पैसों का कैसे बंदरबांट हो रहा है। सवाल सिर्फ 32 लाख का नहीं है, सवाल मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी की उस साख का है, जो इन बंद एसी की घुटन में हर रोज दम तोड़ रही है।
गर्मी ने छीना रंगमंच का आनंद
वरिष्ठ लेखक रफी शब्बीर का कहना है कि हमने मई में अंजनी सभागार में ‘खाला कमाल’ नाटक का मंचन ‘बेगम आफ भोपाल’ के बैनर तले किया था। शो हाउसफुल था, लेकिन सभागार का सेंट्रल एसी खराब होने से दर्शकों को भीषण गर्मी झेलनी पड़ी।
कई लोग नाटक बीच में छोड़कर चले गए। उस समय किराए के एसी की भी व्यवस्था नहीं थी, सिर्फ पंखे चल रहे थे। पंखों के शोर की वजह से पीछे बैठे दर्शकों तक कलाकारों के संवाद साफ नहीं पहुंच रहे थे।
करीब 15-20 मिनट बाद पंखे बंद करवाने पड़े, ताकि संवाद सुनाई दें, लेकिन फिर गर्मी इतनी बढ़ गई कि दर्शक एक-एक कर बाहर जाने लगे। महीनों की मेहनत से तैयार किया गया नाटक इस अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया। कलाकारों के लिए इससे ज्यादा पीड़ादायक कुछ नहीं हो सकता।
वहीं कला समीक्षक मंसूर रशीद खान के अनुसार रवींद्र भवन के खराब एसी का मुद्दा मैं लंबे समय से उठा रहा हूं। 15 जून को एक कार्यक्रम में जब कलाकार और दर्शक गर्मी से बेहाल दिखे तो मैंने फेसबुक पर तस्वीरों के साथ लिखा था कि रवींद्र भवन का सेंट्रल एयर कंडीशनर लगभग दो महीने से बंद पड़ा है।










































