Chandrima Bhattacharya Resigns TMC: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC Political Crisis) इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर मची खींचतान अब खुलकर सड़कों और दफ्तरों पर दिखने लगी है। ममता बनर्जी की बेहद भरोसेमंद सहयोगी और राज्य की पूर्व वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने टीएमसी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है।
इतना ही नहीं, उन्होंने पार्टी की ‘साइनिंग अथॉरिटी’ (दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का अधिकार) भी छोड़ दी है। चंद्रिमा का यह कदम पार्टी में बड़े पैमाने पर चल रहे इस्तीफों, बगावत और दलबदल के सिलसिले को और तेज करने वाला माना जा रहा है। चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस फैसले का बागी और निष्कासित नेताओं ने स्वागत किया है।
यह तो होना ही था-संदीपान साहा
निष्कासित टीएमसी विधायक संदीपान साहा ने कहा कि यह तो होना ही था। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि ‘कालीघाट’ (ममता बनर्जी का निवास क्षेत्र) में अब काम करने का माहौल ही नहीं बचा है, यही वजह है कि जिसे भी कोई नया पद दिया जा रहा है, वह लगातार इस्तीफा दे रहा है। साहा ने दावा किया कि 22 जून की बैठक में पहले ही राष्ट्रीय कार्यसमिति के अध्यक्ष और सदस्यों का चुनाव हो चुका है। इस राजनीतिक ड्रामे के बीच शुक्रवार को कोलकाता में स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट ने कोलकाता के ईएम बाईपास स्थित टीएमसी मुख्यालय ‘तृणमूल भवन’ पर धावा बोल दिया।
बागी गुट के नेताओं ने दफ्तर पर किया कब्जा
बागी गुट के नेताओं ने दफ्तर पर कब्जा कर लिया, पुराने ताले बदल दिए और वहां नए पोस्टर लगा दिए। ऋतब्रत बनर्जी के साथ फिरहाद हकीम, जावेद खान, संदीपान साहा और पार्टी कोषाध्यक्ष अखरुज्जमा जैसे बड़े चेहरे मौजूद थे। इन नेताओं ने साफ कहा कि अब पार्टी यहीं से संचालित होगी और उनका धड़ा ही ‘असली तृणमूल’ है। गौरतलब है कि इससे ठीक एक दिन पहले इस बागी गुट ने दिल्ली में चुनाव आयोग के सामने पेश होकर टीएमसी के नाम, सिंबल और पूरे संगठन पर अपना दावा ठोका था। टीएमसी की यह अंदरूनी जंग अब पार्टी के अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है।









































