जम्मू कश्मीर विधानसभा की कार्यवाही 10 दिवसीय सत्र के बाद बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर ने बुधवार को सात घंटे तक चली बैठक के बाद सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।mar Abdullah : जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र में मंगलवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के एक बयान पर खूब ठहाके लगे। पूर्व विधायकों का पेंशन बढ़ाने वाला विधेयक पारित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ‘यह विधेयक पारित हो गया है, इसलिए मेरे लिए अब घर जाना आसान होगा। क्योंकि मेरे घर पर एक पूर्व विधायक है।’ विधानसभा में जब यह विधेयक पारित हुआ, उस समय उमर के पिता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला सदन की वीआईपी गैलरी मौजूद थे और कार्यवाही देख रहे थे। उमर के इस बयान पर वह हंस पड़े। खास बात यह है कि पेंशन में इस वृद्धि का भाजपा के विधायकों ने विरोध नहीं किया। उमर की बात सुनकर वे भी हंसने लगे।
BJP ने प्रस्ताव के खिलाफ नारेबाजी की
इससे पहले, सदन में दिन की शुरुआत भी तनावपूर्ण रही। जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई, बीजेपी नेताओं ने खड़े होकर सोमवार को ध्वनिमत से पारित राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। बीजेपी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के खिलाफ नारे लगाए और उनसे आसन छोड़ने की मांग की। बीजेपी की नारेबाजी के जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेता भी खड़े हो गए और विपक्षी पार्टी के खिलाफ नारे लगाने लगे। इस दौरान उन्होंने बीजेपी नेताओं को ‘वोट चोर’ कहा।
अनिश्चितकाल के लिए विधानसभा स्थगित
जम्मू कश्मीर विधानसभा की कार्यवाही 10 दिवसीय सत्र के बाद बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर ने बुधवार को सात घंटे तक चली बैठक के बाद सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। राठेर ने कहा कि विधानसभा की सात बैठकों में 25 घंटे से अधिक समय तक कामकाज हुआ। अध्यक्ष ने कहा कि कुल 646 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें से 328 तारांकित थे। उन्होंने कहा कि 625 प्रश्न सूचीबद्ध किए गए, जिनमें से एक को वापस ले लिया गया, जबकि 25 प्रश्नों की अनुमति नहीं दी गई। राठेर ने कहा कि 79 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 23 को अस्वीकार कर दिया गया और 56 को अनुमति दी गई।8 में से छह विधयेक हुए पारित
उन्होंने कहा कि दो सरकारी संकल्प पेश किये गये और दोनों को स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि 70 गैर सरकारी संकल्प प्राप्त हुए, जिनमें से सात को सूचीबद्ध किया गया, जबकि एक को सदन में चर्चा के लिए लिया गया लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। सरकार ने आठ विधेयक पेश किए, जिनमें से छह पारित किये गये और दो वापस ले लिए गए। राठेर ने सदस्यों को धन्यवाद देते हुए कहा, ’49 निजी विधेयक लंबित थे और 23 नए विधेयक पेश किए गए, जिनमें से एक को अनुमति नहीं दी गई। एक विधेयक को सदन ने चर्चा के लिए लिया।’






































