‘हमारे सामने सभी बराबर’, राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि केस में SC की सख्त टिप्पणी; कहा- जल्दी सुनवाई चाहिए तो अर्जी दें

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Bharat Jodo Yatra: राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। यह मामला राहुल गांधी के 16 दिसंबर 2022 के एक बयान से जुड़ा है।Bharat Jodo Yatra: राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने शिकायतकर्ता से कहा कि अगर वह इस मामले की जल्द सुनवाई चाहता है तो इसके लिए अलग से आवेदन दाखिल करे। कोर्ट ने साफ कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सभी के लिए एक जैसी प्रक्रिया है और कोई भी व्यक्ति विशेष नहीं है।

शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने कहा कि राहुल गांधी कोई विशिष्ट व्यक्ति नहीं हैं और उनकी ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पिछले पांच महीने से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मामले को इस तरह लंबित रखना संस्था के लिए भी ठीक नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “प्रक्रिया का पालन कीजिए। जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दाखिल कीजिए। हमारे सामने सभी बराबर हैं। आवेदन दाखिल कीजिए, हम इसे सुनेंगे।”

क्या है राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला?

यह मामला राहुल गांधी के 16 दिसंबर 2022 के एक बयान से जुड़ा है। उन्होंने भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था, “चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय जवानों की पिटाई कर रहे हैं।” शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस बयान से भारतीय सेना और सैन्य बलों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और यह बयान मानहानि वाला था।यह शिकायत उदय शंकर श्रीवास्तव की ओर से उनके वकील विवेक तिवारी ने दाखिल की थी। उदय शंकर श्रीवास्तव सीमा सड़क संगठन (BRO) के पूर्व निदेशक रहे हैं और उनका पद सेना के कर्नल के बराबर माना जाता है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी की टिप्पणी 9 दिसंबर, 2022 को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प के संदर्भ में भारतीय सैन्य बलों के लिए अपमानजनक थी।

निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला?

लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में पेश होने के लिए समन जारी किया था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा ने उन्हें 24 मार्च को सुनवाई के लिए पेश होने का निर्देश दिया था। राहुल गांधी ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।हाईकोर्ट ने कहा था कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 199 के तहत अपराध से सीधे तौर पर प्रभावित व्यक्ति के अलावा वह व्यक्ति भी शिकायत कर सकता है, जिसे उस कथित अपराध से नुकसान पहुंचा हो या जिसकी भावनाएं और हित प्रभावित हुए हों। कोर्ट ने शिकायतकर्ता के सेना के प्रति सम्मान और राहुल गांधी के बयान से व्यक्तिगत रूप से आहत होने की बात को भी ध्यान में रखा था।

इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने पहले इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। साथ ही कोर्ट ने उनसे पूछा था कि ऐसे मुद्दे सोशल मीडिया पर उठाने के बजाय संसद में क्यों नहीं उठाए जाते। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि उनके बयान के पीछे कोई विश्वसनीय सामग्री या आधार था या नहीं।

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